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सोनम वांगचुक अस्पताल से डिस्चार्ज, राजघाट पर श्रद्धांजलि देने का किया ऐलान

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को गुरुग्राम के निजी अस्पताल से छुट्टी मिल गई है। उन्होंने राजघाट पर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देने का निर्णय लिया है। वांगचुक ने अनशन के दौरान दिल्ली पुलिस द्वारा उठाए जाने के बाद अस्पताल में भर्ती हुए थे। उनकी पत्नी ने अस्पताल प्रशासन पर पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया था। जानें वांगचुक के आंदोलन और उनके स्वास्थ्य के बारे में और क्या कहा।
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सोनम वांगचुक का अस्पताल से डिस्चार्ज

गुरुग्राम। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को अब गुरुग्राम के एक निजी अस्पताल से छुट्टी दी जा रही है। यह जानकारी उन्होंने एक्स पर साझा किए गए एक वीडियो में दी। वांगचुक को जंतर-मंतर पर अनशन के दौरान दिल्ली पुलिस द्वारा जबरन उठाए जाने के बाद पहले सफदरजंग अस्पताल में भर्ती किया गया था, और फिर दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश पर उन्हें निजी अस्पताल में स्थानांतरित किया गया था।


राजघाट पर श्रद्धांजलि देने का कार्यक्रम

वीडियो संदेश में वांगचुक ने कहा, 'आज वह दिन आ गया है जब मैं अस्पताल से बाहर जा रहा हूं। मैं बेहतर महसूस कर रहा हूं और धीरे-धीरे मेरी सेहत में सुधार हो रहा है। आज मैं राजघाट जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित करूंगा और फिर लद्दाख के लिए रवाना हो जाऊंगा।' उन्होंने यह भी याद दिलाया कि जब उन्होंने अनशन शुरू किया था, तब भी उन्होंने राजघाट पर श्रद्धांजलि दी थी।


अनशन के दौरान की घटनाएँ

वांगचुक ने आगे कहा कि 'मैं दिल से सभी का धन्यवाद करना चाहता हूं जिन्होंने इस आंदोलन में भाग लिया और हम सफल रहे। हम आगे भी जुड़े रहेंगे। जय हिंद।'


अनशन तोड़ने में केंद्रीय मंत्रियों की भूमिका

गौरतलब है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इससे पहले, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने अस्पताल जाकर वांगचुक का अनशन तोड़ने में मदद की थी। सफदरजंग अस्पताल में वांगचुक का अनशन 21वें दिन भी जारी था। अनशन तोड़ने के बाद वांगचुक ने कहा कि सरकार की देरी से नुकसान केवल सरकार का होगा।


वांगचुक की पत्नी की चिंता

वांगचुक की पत्नी गीतांजिल ने सफदरजंग अस्पताल के प्रशासन पर पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा कि वह चाहती थीं कि वांगचुक का इलाज निजी अस्पताल में किया जाए। इसके बाद, दिल्ली हाई कोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया और उन्हें निजी अस्पताल में स्थानांतरित किया गया।