सोनम वांगचुक का अनशन: 1984 की यादें ताजा
सोनम वांगचुक का अनशन और पुलिस की कार्रवाई
आज सुबह, पुलिस ने सोनम वांगचुक को जबरन उनके प्रोटेस्ट स्थल से हटाकर सफदरजंग अस्पताल में भेज दिया। वांगचुक पिछले 20 दिनों से दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक के खिलाफ भूख हड़ताल कर रहे थे। पुलिस उन्हें सफेद चादर के पीछे छिपाते हुए ले जाती हुई नजर आई। यह घटना 1984 में उनके पिता सोनम वांग्याल के अनशन की याद दिलाती है, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने लेह जाकर उनके अनशन को समाप्त कराया था.
1984 का अनशन और उसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
करीब 42 साल पहले, सोनम वांगचुक के पिता, दिवंगत सोनम वांग्याल ने लद्दाख के समुदायों को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा देने की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की थी। उस समय इंदिरा गांधी ने लेह जाकर वांग्याल से मुलाकात की और उनकी मांग पर सकारात्मक कदम उठाने का आश्वासन दिया था। इसके बाद वांग्याल ने अपना अनशन समाप्त कर दिया।
सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं
आज सोनम वांगचुक के साथ हुई पुलिस की कार्रवाई ने 1984 के अनशन की यादें ताजा कर दी हैं। कई नेताओं और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने उस समय इंदिरा गांधी के रवैये की तुलना मौजूदा सरकार के रुख से की है। लोग अपनी राय सोशल मीडिया पर साझा कर रहे हैं।
इंदिरा गांधी का आश्वासन
सोशल मीडिया पर उस समय की तस्वीरें भी साझा की जा रही हैं, जब इंदिरा गांधी ने अनशन पर बैठे सोनम वांग्याल से मुलाकात की थी। उन्होंने वांग्याल को आश्वासन दिया था कि उनकी मांग पर विचार किया जाएगा, जिसके बाद वांग्याल ने अपना अनशन समाप्त करने का निर्णय लिया। 1989 में लद्दाख के समुदायों को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा भी मिल गया।
पवन खेड़ा की टिप्पणी
पवन खेड़ा ने भी वांग्याल और वांगचुक के आंदोलनों के प्रति सरकारों की प्रतिक्रिया की तुलना की। जंतर मंतर पर वांगचुक से मुलाकात के बाद उन्होंने 'एक्स' पर लिखा कि शांतिपूर्ण विरोध करना संविधान का अधिकार है और अनशन कर रहे लोगों से संवाद करना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी कहा कि 1984 में इंदिरा गांधी ने यही किया था।
सोशल मीडिया पर पवन खेड़ा का ट्वीट
https://twitter.com/Pawankhera/status/2078013671742345272
