सोनम वांगचुक का अनशन: 26 दिन बाद उठे सवालों ने दी मानसिक पीड़ा
नई दिल्ली में अनशन का दर्द
नई दिल्ली: 26 दिनों तक जंतर-मंतर पर छात्रों के अधिकारों के लिए अनशन करने वाले प्रसिद्ध सामाजिक और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक इस समय गंभीर शारीरिक और मानसिक पीड़ा का सामना कर रहे हैं। भूख हड़ताल के चलते उनका स्वास्थ्य काफी बिगड़ चुका है, और सोशल मीडिया पर उन पर हो रहे हमलों ने उनकी स्थिति को और भी कठिन बना दिया है। यह पीड़ा इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि उन पर सवाल उठाने वाले वही छात्र और समर्थक हैं, जिनके लिए उन्होंने इतने दिनों तक अन्न का एक दाना नहीं खाया। कई राजनीतिक दलों के नेताओं ने उन पर सरकार के साथ 'समझौता' करने का आरोप लगाया, जिससे वांगचुक इतनी आहत हुए कि उन्होंने अस्पताल के आईसीयू से एक वीडियो जारी कर अपनी भावनाएं व्यक्त कीं।
अनशन की शुरुआत और समर्थन
28 जून से अनशन की शुरुआत
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) द्वारा 20 जून को शुरू किए गए इस आंदोलन को असली ताकत तब मिली जब सोनम वांगचुक 28 जून को छात्रों के समर्थन में अनशन पर बैठ गए। जैसे-जैसे अनशन का समय बढ़ा, इसे देश-विदेश के मीडिया में व्यापक कवरेज मिलने लगा। 18 जुलाई को जब पुलिस ने उन्हें धरना स्थल से उठाया, तो देशभर के युवाओं में उनके प्रति सहानुभूति की लहर उठी। वांगचुक ने 26 दिनों बाद अपना अनशन तब समाप्त किया, जब सरकार ने उनकी मुख्य मांग पर लिखित आश्वासन दिया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी।
सोशल मीडिया पर नकारात्मक टिप्पणियों का सामना
अनशन तोड़ने के बाद की स्थिति
जैसे ही सोनम वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त किया, उनके खिलाफ सोशल मीडिया पर नकारात्मक टिप्पणियों की बाढ़ आ गई। सीजेपी के नेताओं ने उनकी अनशन तोड़ने पर खुशी तो जाहिर की, लेकिन यह भी स्पष्ट किया कि उनकी राहें अब अलग हैं। पार्टी ने कहा कि वांगचुक को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से कम कुछ भी मंजूर नहीं है। इसके बाद कई समर्थकों ने उन पर सरकार के सामने झुकने और समझौता करने के आरोप लगाए। आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने भी इस मुद्दे पर सवाल उठाए।
वांगचुक का दर्द और पत्नी का समर्थन
अस्पताल से वांगचुक का संदेश
सोनम वांगचुक ने अपने खिलाफ हो रहे हमलों से दुखी होकर एक वीडियो जारी किया, जिसमें उन्होंने अपनी स्थिति के बारे में बताया। उन्होंने कहा, 'मैंने 26 दिन तक भूखा रहकर अपने शरीर का 11 किलो वजन कम किया है। क्या अब मुझे किसी से चरित्र प्रमाण पत्र लेना होगा कि मेरा अनशन कितना पवित्र था?' उन्होंने देश में उत्पन्न इस तरह की सोच पर गहरा दुख व्यक्त किया।
पत्नी का भावुक बयान
उनकी पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने भी आलोचकों को जवाब देते हुए कहा, 'वह आज भी अस्पताल में भर्ती हैं। उन्होंने अपने आराम को छोड़कर युवाओं के लिए बलिदान दिया है। हमें उन पर अपनी राजनीतिक उम्मीदें थोपने से पहले मानवीय सहानुभूति दिखानी चाहिए।'
