सोनम वांगचुक का अनशन: सरकार से प्रमुख मांगों पर कार्रवाई की अपील
सोनम वांगचुक का पत्र
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक, जो पिछले 25 दिनों से मेदांता अस्पताल में शिक्षा सुधार के लिए अनशन पर हैं, ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा और केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह को एक खुला पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने दोनों मंत्रियों का धन्यवाद किया है और उनसे अस्पताल में मुलाकात करने तथा अनशन समाप्त करने की अपील की है। वांगचुक ने बताया कि बातचीत के दौरान सरकार ने उनकी कुछ महत्वपूर्ण मांगों पर सकारात्मक विचार करने का आश्वासन दिया है।
सरकार से दो प्रमुख मुद्दों पर उम्मीद
पत्र में वांगचुक ने उल्लेख किया कि उन्हें आश्वासन मिला है कि परीक्षा प्रश्नपत्र लीक के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को उचित मुआवजा देने पर विचार किया जाएगा। इसके साथ ही, संसद में इस मुद्दे पर सार्थक चर्चा कराने और जवाबदेही तय करने का भरोसा भी दिया गया है, जिसमें केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे का मुद्दा भी शामिल है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार इन मुद्दों पर ठोस कदम उठाएगी।
युवाओं पर कार्रवाई नहीं करने की शर्त
वांगचुक ने स्पष्ट किया कि वह अनशन समाप्त करना चाहते हैं और शिक्षा के क्षेत्र में अपने कार्यों पर लौटना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि विभिन्न राजनीतिक दलों के लगभग 65 सांसदों ने उनसे अनशन खत्म करने की अपील की है। हालांकि, उन्होंने कहा कि जब तक सरकार यह स्पष्ट आश्वासन नहीं देती कि आंदोलन में शामिल किसी भी युवा के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी, तब तक वह अपना अनशन जारी रखेंगे। उनके अनुसार, इन युवाओं का एकमात्र उद्देश्य निष्पक्ष और जवाबदेह शिक्षा प्रणाली की मांग करना है।
लोकतंत्र और शांतिपूर्ण विरोध का संदेश
सोनम वांगचुक ने 20 जुलाई को आयोजित 'चलो संसद' मार्च का जिक्र करते हुए कहा कि यह प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण था, फिर भी प्रदर्शनकारियों को पुलिस की कार्रवाई का सामना करना पड़ा। उन्होंने सरकार से अपील की कि आंदोलन में शामिल लोगों को किसी भी प्रकार की कानूनी प्रताड़ना का सामना न करना पड़े और भविष्य में पुलिस बल का अत्यधिक प्रयोग न किया जाए। पत्र के अंत में उन्होंने लिखा कि लोकतंत्र की असली ताकत इस बात से तय होती है कि वह असहमति रखने वाले, विशेषकर युवाओं, के साथ कितना न्यायपूर्ण और सम्मानजनक व्यवहार करता है।
