सोनम वांगचुक की चेतावनी: लद्दाख के मुद्दों पर आंदोलन की तैयारी
नई दिल्ली में आंदोलन की चेतावनी
नई दिल्ली: लद्दाख के मुद्दों को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने केंद्र सरकार को एक बार फिर आंदोलन की चेतावनी दी है। उन्होंने गुरुवार को कहा कि अगर सरकार अगले एक सप्ताह के भीतर लद्दाख की मांगों पर ठोस आश्वासन नहीं देती है, तो 19 से 24 सितंबर के बीच नया आंदोलन शुरू किया जाएगा। वहीं वांगचुक ने कहा कि इस दौरान पदयात्रा भी निकाली जाएगी।
गृह मंत्रालय से स्पष्ट आश्वासन की कमी
वांगचुक ने दिल्ली में मीडिया से बातचीत में कहा कि लद्दाख के प्रतिनिधियों को उम्मीद थी कि बातचीत के जरिए मांगों का समाधान निकलेगा और आंदोलन की जरूरत नहीं पड़ेगी। हालांकि, गृह मंत्रालय की उप-समिति के साथ हुई बैठक के बाद उन्हें ऐसा कोई स्पष्ट आश्वासन नहीं मिला, जिससे उनकी निराशा बढ़ी है। उन्होंने कहा कि अभी भी सरकार से सकारात्मक जवाब मिलने की उम्मीद है। लेकिन अगर एक सप्ताह के भीतर कोई भरोसा नहीं दिया गया तो लद्दाख के लोगों को दोबारा आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा।
बैठक के बाद लद्दाख समूह की निराशा
बुधवार को लेह एपेक्स बॉडी (LAB) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) के प्रतिनिधियों ने गृह मंत्रालय के अधिकारियों के साथ बैठक की थी। बातचीत में लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और क्षेत्र के संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा समेत कई मुद्दों पर चर्चा हुई। लद्दाख के प्रतिनिधियों का कहना है कि बैठक से पहले उन्हें उम्मीद थी कि केंद्र शासित प्रदेश के स्तर पर प्रस्तावित निर्वाचित निकाय को लेकर कोई मसौदा तैयार होगा। हालांकि, बैठक में ऐसा ड्राफ्ट सामने नहीं आया।
राज्य के दर्जे और संवैधानिक सुरक्षा की मांग
KDA के प्रतिनिधि सज्जाद कारगिली ने कहा कि सरकार की ओर से कही गई बातों को तभी संतोषजनक माना जाएगा, जब उनका लिखित मसौदा सामने आएगा। इसके बाद ही यह देखा जा सकेगा कि प्रस्ताव वास्तव में जमीन पर किस तरह लागू होगा।
लद्दाख 2019 तक जम्मू-कश्मीर का हिस्सा था। अनुच्छेद 370 के प्रावधानों में बदलाव के बाद इसे अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया। इसके बाद से LAB और KDA समेत लद्दाख के कई समूह राज्य का दर्जा, संवैधानिक सुरक्षा और केंद्र शासित प्रदेश में एक निर्वाचित विधायी निकाय की मांग करते रहे हैं। इन संगठनों का कहना है कि लद्दाख के प्रशासन में शक्तियों के बंटवारे, खासकर कानून-व्यवस्था से जुड़े अधिकारों को लेकर अभी भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। ऐसे में केंद्र की ओर से ठोस कदम नहीं उठाए जाने पर आंदोलन फिर तेज होने के संकेत दिए गए हैं।
