सोनम वांगचुक के अनशन का 22वां दिन: पत्नी ने साझा किया संघर्ष का नया दृष्टिकोण
सोनम वांगचुक का अनशन जारी
लद्दाख के शिक्षाविद् सोनम वांगचुक और सामाजिक कार्यकर्ता सुधाकर का अनशन अब 22वें दिन में प्रवेश कर चुका है। इस दौरान, उनकी पत्नी ने एक भावुक लेख के माध्यम से उनके संघर्ष को एक नई दृष्टि से प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि वह सोनम को एक आंदोलनकारी के रूप में नहीं, बल्कि एक शिक्षक के रूप में देखती हैं, जो देश की शिक्षा प्रणाली से जुड़े मुद्दों के लिए अपनी जिम्मेदारी छोड़कर सड़क पर उतरे हैं।
शिक्षा के प्रति दृष्टिकोण
उन्होंने बताया कि पिछले तीन दशकों से उनका एक ही सपना रहा है - शिक्षा के माध्यम से देश को बेहतर बनाना। सोनम वांगचुक ने SECMOL और HIAL जैसे संस्थानों के माध्यम से शिक्षा को समाज और लोगों की जिंदगी से जोड़ने का प्रयास किया है। उनकी पत्नी का मानना है कि शिक्षा केवल डिग्री या नौकरी पाने का साधन नहीं, बल्कि यह व्यक्ति के व्यक्तित्व को विकसित करने और उनकी छिपी प्रतिभा को पहचानने का माध्यम होना चाहिए।
गीतांजलि का शिक्षा के उद्देश्य पर विचार
गीतांजलि जे आंग्मो ने अपने लेख में बताया कि 1989 में श्री अरविंद आश्रम की यात्रा ने उनकी सोच को पूरी तरह बदल दिया। उन्होंने यह समझा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल पढ़ाई या परीक्षा पास करना नहीं, बल्कि व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक विकास को भी आगे बढ़ाना है। उनका मानना है कि वर्तमान शिक्षा प्रणाली युवाओं को रोजगार तो देती है, लेकिन जीवन का उद्देश्य खोजने में मदद नहीं करती।
स्थानीय समस्याओं के समाधान की दिशा में कदम
उन्होंने कहा कि HIAL जैसे संस्थानों की स्थापना इसी सोच के साथ की गई है, जहां स्थानीय समस्याओं के समाधान, व्यावहारिक शिक्षा, नवाचार, सहानुभूति और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दिया जाता है। उनके अनुसार, AI के युग में भी इंसान की सबसे बड़ी ताकत उसकी संवेदनशीलता, रचनात्मकता और चरित्र है। इसलिए शिक्षा प्रणाली में ऐसे सुधार आवश्यक हैं जो बच्चों को केवल नौकरी के लिए नहीं, बल्कि जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए भी तैयार करें।
पुलिस पर गंभीर आरोप
गीतांजलि ने आरोप लगाया कि सोनम वांगचुक का अनशन केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था में बदलाव की मांग का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि अनशन के दौरान सोनम को उनकी इच्छा के खिलाफ सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया, जहां भारी पुलिस मौजूदगी के कारण माहौल इलाज से अधिक हिरासत जैसा महसूस हुआ।
शिक्षा के मुद्दे को प्राथमिकता देने की अपील
उन्होंने उम्मीद जताई कि शिक्षा का मुद्दा संसद और सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल होगा। उनका कहना है कि सोनम वांगचुक के संघर्ष का सबसे बड़ा सम्मान यही होगा कि देश ऐसी शिक्षा व्यवस्था विकसित करे, जहां हर बच्चे को अपनी पूरी क्षमता पहचानने और समाज के लिए सार्थक योगदान देने का अवसर मिल सके।
