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सोनम वांगचुक के समर्थन में सोनाक्षी सिन्हा और दिया मिर्जा का बयान

दिल्ली में चल रहे छात्र आंदोलन के दौरान, सोनम वांगचुक के समर्थन में बॉलीवुड की अभिनेत्रियाँ सोनाक्षी सिन्हा और दिया मिर्जा ने अपने विचार साझा किए। सोनाक्षी ने पुलिस की कार्रवाई की निंदा की और छात्रों की सराहना की, जबकि दिया ने शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार का समर्थन किया। इस बीच, सोनम वांगचुक की तबीयत बिगड़ने के कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जानें इस आंदोलन के बारे में और क्या हो रहा है।
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दिल्ली में छात्र आंदोलन के दौरान समर्थन

नई दिल्ली। हाल ही में, दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन के दौरान, जब पुलिस ने सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद सोनम वांगचुक को वहां से हटाया, तो कई लोगों ने उनका समर्थन किया। इस बीच, बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्रियाँ सोनाक्षी सिन्हा और दिया मिर्जा ने भी सोनम का समर्थन किया।


सोनाक्षी सिन्हा का बयान

सोनाक्षी ने क्या कहा?

सोनाक्षी सिन्हा ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो साझा करते हुए पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, 'आज जो कुछ भी सोनम सर के साथ हुआ, वह उचित नहीं था। मुझे खुशी है कि वह सुरक्षित हैं और उनकी पत्नी उनके साथ हैं। मैंने देखा है कि पिछले कुछ दिनों में हजारों लोग उनके साथ खड़े हैं।'

उन्होंने आंदोलन में शामिल छात्रों की सराहना की और कहा कि इतनी कठिनाइयों के बावजूद, वे सभी शांतिपूर्ण और सम्मानजनक तरीके से अपनी बात रख रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि देश की असली ताकत उसका युवा है। अंत में, उन्होंने 20 जुलाई को संसद मार्च करने वाले लोगों से अपील की कि वे अपनी आवाज उठाएं, लेकिन शांति, एकता और सम्मान बनाए रखें। यही इस आंदोलन की असली ताकत है।


दिया मिर्जा का समर्थन

दिया मिर्जा ने भी जताया समर्थन

दिया मिर्जा ने भी सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा कर इस आंदोलन का समर्थन किया। उन्होंने लिखा कि वे देश के छात्रों के साथ खड़ी हैं और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार का समर्थन करती हैं। उन्होंने कहा, 'मैं इस देश के छात्रों के साथ हूं। मैं जवाबदेही, पारदर्शिता और शिक्षा प्रणाली में सुधार की मांग का समर्थन करती हूं। मैं सोनम वांगचुक, नेहा, अमीन और मनीष के साथ खड़ी हूं।'


सोनम वांगचुक की तबीयत

वांगचुक की तबीयत बिगड़ी

इस बीच, सोनम वांगचुक की तबीयत बिगड़ने के कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जानकारी के अनुसार, 20 दिन की भूख हड़ताल के बाद उनकी स्थिति कमजोर हो गई है। डॉक्टर उनकी लगातार निगरानी कर रहे हैं और उन्हें इलाज लेने की सलाह दी जा रही है।