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सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल में रहना होगा, अदालत ने निजी अस्पताल में शिफ्ट करने से किया इनकार

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल में रहने का आदेश दिया गया है। अदालत ने उनकी पत्नी द्वारा दायर याचिका को खारिज करते हुए कहा कि वांगचुक को वहीं उपचार दिया जा रहा है। वांगचुक ने नीट पेपर लीक मामले में जवाबदेही की मांग को लेकर भूख हड़ताल शुरू की थी। सुनवाई के दौरान वकील ने उनकी स्वास्थ्य स्थिति को सामान्य बताया। अगली सुनवाई 23 जुलाई को होगी।
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सोनम वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति पर अदालत का निर्णय


नई दिल्ली। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल में ही रहने का आदेश दिया गया है। अदालत ने उन्हें निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने की याचिका को खारिज कर दिया। वांगचुक की पत्नी, सोनम आंगमो ने अदालत में याचिका दायर की थी कि उनके पति को निजी अस्पताल में भर्ती कराया जाए। रविवार को दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई की। अदालत ने कहा कि 21 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे वांगचुक को जंतर मंतर से हटाना उचित था और उन्हें सफदरजंग अस्पताल में ही रखा जाना चाहिए।


दिल्ली हाईकोर्ट की एकल बेंच ने कहा, 'स्वास्थ्य में गिरावट और डिवीजन बेंच के आदेश के चलते उन्हें सरकारी अस्पताल में भेजा गया। सरकार की यह कार्रवाई मनमानी नहीं कही जा सकती।' अदालत ने यह भी कहा कि वांगचुक को वही दवाएं दी जा रही हैं, जिन पर उनकी सहमति है। कोर्ट ने केंद्र और दिल्ली सरकार के साथ पुलिस को तीन दिन के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। दूसरी ओर, वांगचुक की पत्नी ने इस फैसले को डबल बेंच में चुनौती देने की बात कही है।


दिल्ली पुलिस ने शनिवार सुबह वांगचुक को जंतर मंतर से उठाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया था। अस्पताल में भी वांगचुक की भूख हड़ताल जारी है। कॉकरोच जनता पार्टी के बैनर तले, सोनम वांगचुक ने नीट पेपर लीक मामले में जवाबदेही तय करने और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर 28 जून से भूख हड़ताल शुरू की थी।


रविवार को हाई कोर्ट में हुई सुनवाई में वांगचुक के वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि ऐसा कोई मेडिकल रिकॉर्ड नहीं है जो यह दर्शाए कि उनकी स्थिति इतनी गंभीर थी कि उन्हें जबरन अस्पताल ले जाना पड़ा। सभी पैरामीटर सामान्य हैं। सिब्बल ने यह भी कहा कि वे केवल यह चाहते हैं कि वांगचुक को निजी अस्पताल में भर्ती होने की अनुमति दी जाए। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वांगचुक हिरासत में नहीं हैं और उनके परिवार के सदस्यों को उनसे मिलने की अनुमति है।


हालांकि, वांगचुक की पत्नी गीतांजलि ने कहा कि सफदरजंग अस्पताल में उन्हें बगल का कमरा दिया गया है, लेकिन वहां कोई प्राइवेसी नहीं है। उन्होंने बताया कि पुलिस पूरे फ्लोर पर मौजूद है और कमरे में भी पुलिस वाले आते हैं या बाहर से झांकते रहते हैं। इस मामले में अगली सुनवाई 23 जुलाई को होगी।