सोनिया गांधी के मतदाता सूची में नाम शामिल करने के मामले में नई सुनवाई
दिल्ली अदालत का महत्वपूर्ण निर्णय
नई दिल्ली। दिल्ली की एक अदालत ने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के खिलाफ भारतीय नागरिकता प्राप्त करने से तीन साल पहले मतदाता सूची में उनके नाम के शामिल होने के आरोप की जांच से संबंधित मजिस्ट्रेट अदालत के आदेश को रद्द कर दिया है। इस मामले को फिर से विचार के लिए भेजा गया है और अगली सुनवाई 29 सितंबर को होगी।
विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने अधिवक्ता विकास त्रिपाठी द्वारा दायर पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई की। त्रिपाठी सेंट्रल दिल्ली कोर्ट बार एसोसिएशन के उपाध्यक्ष हैं। न्यायाधीश ने कहा कि अदालत के आदेश में कानून के प्रति निष्ठा होनी चाहिए और तथ्यों के साथ खिलवाड़ नहीं होना चाहिए।
अदालत ने मजिस्ट्रेट के आदेश को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि इसमें पर्याप्त कारण नहीं बताए गए हैं और मामले पर नए सिरे से विचार करने का निर्देश दिया। त्रिपाठी की शिकायत में आरोप है कि सोनिया गांधी का नाम 1980 में नई दिल्ली संसदीय क्षेत्र की मतदाता सूची में अवैध रूप से शामिल किया गया था, जबकि उन्होंने भारतीय नागरिकता 1983 में प्राप्त की थी।
शिकायत के अनुसार, उनका नाम 1982 में मतदाता सूची से हटा दिया गया था, लेकिन 1983 में फिर से शामिल किया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि यह दोबारा शामिल किया जाना 30 अप्रैल, 1983 को उनके भारतीय नागरिक बनने से पहले हुआ था।
मजिस्ट्रेट अदालत ने शिकायत को खारिज करते हुए कहा था कि यह बिना पर्याप्त सबूत के दावों पर आधारित है और इसमें धोखाधड़ी या जालसाजी की जानकारी नहीं है।
विशेष न्यायाधीश ने कहा कि संसदीय लोकतंत्र में मतदाता सूची की पवित्रता हर नागरिक के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी कहा कि मतदाता सूची में हेरफेर और धोखाधड़ी के आरोपों पर उचित जांच होनी चाहिए।
अदालत ने यह भी कहा कि एसीजेएम के आदेश में यह नहीं बताया गया कि सोनिया गांधी का नाम 1980 में कैसे शामिल हुआ, 1982 में कैसे हटाया गया और 1983 में फिर से कैसे दर्ज किया गया।
अंत में, अदालत ने मजिस्ट्रेट का आदेश रद्द करते हुए मामले पर नए सिरे से विचार करने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई 29 सितंबर को होगी।
