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सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट, अमेरिका-ईरान समझौते का असर

गुरुवार को अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते के बाद सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट आई। एमसीएक्स पर चांदी की कीमत 2.5 प्रतिशत और सोने की कीमत 1.55 प्रतिशत गिरी। जानें इस गिरावट के पीछे के कारण और वर्तमान बाजार स्थिति के बारे में।
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सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट, अमेरिका-ईरान समझौते का असर

सोने-चांदी की कीमतों में भारी गिरावट

मुंबई- अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते के बाद, साथ ही फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को स्थिर रखने के निर्णय के चलते गुरुवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने और चांदी की कीमतों में महत्वपूर्ण गिरावट आई।


गुरुवार के कारोबारी सत्र में, एमसीएक्स पर जुलाई फ्यूचर्स चांदी की कीमत 2,51,807 रुपए से 2.5 प्रतिशत गिरकर 2,44,495 रुपए प्रति किलोग्राम के निम्नतम स्तर पर पहुंच गई। आज चांदी की शुरुआत 2,48,000 रुपए पर हुई थी। लेख के समय (सुबह लगभग 11:43 बजे) जुलाई डिलीवरी चांदी 7,057 रुपए यानी 2.80 प्रतिशत गिरकर 2,44,750 रुपए प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रही थी।


इसके अलावा, अगस्त डिलीवरी वाले सोने के वायदा भाव भी गिरकर 1,51,501 रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गए, जो कि 2,378 रुपए यानी 1.55 प्रतिशत की कमी दर्शाता है। दिन के कारोबार में सोने की कीमत 1,53,879 रुपए से गिरकर 1,51,348 रुपए प्रति 10 ग्राम के निचले स्तर पर पहुंच गई। वैश्विक बाजार में, अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते के कारण सोने और चांदी की कीमतों में वृद्धि हुई थी, लेकिन फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों में बढ़ोतरी का संकेत भी दिया है।


अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने फ्रांस में जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ मिलकर इस समझौते पर हस्ताक्षर किए। ईरान की ओर से राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने भी हस्ताक्षर किए। इस समझौते से वैश्विक ऊर्जा संकट में कुछ राहत मिलने की उम्मीद है, जिससे मुद्रास्फीति की चिंताओं और ब्याज दरों में वृद्धि की अटकलें बढ़ी हैं। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि ईंधन की कीमतें कब तक कम हो पाएंगी और होर्मुज जलडमरूमध्य से आवागमन कब सामान्य स्तर पर लौटेगा। फेडरल रिजर्व ने 17 जून को हुई बैठक में बेंचमार्क ब्याज दर को 3.5-3.75 प्रतिशत पर स्थिर रखा और अक्टूबर तक मौद्रिक नीति को सख्त करने का संकेत दिया। उच्च ब्याज दरें कीमती धातुओं के लिए प्रतिकूल होती हैं, क्योंकि इन पर कोई ब्याज नहीं मिलता।