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सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट: क्या निवेश करना सही है?

सोने और चांदी की कीमतों में हालिया गिरावट ने निवेशकों को चिंतित कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में कमी के साथ, घरेलू बाजार पर भी इसका असर पड़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि गिरावट के इस दौर में खरीदारी के अवसर बन सकते हैं, लेकिन सावधानी बरतना आवश्यक है। क्या यह सही समय है निवेश करने का? जानें इस लेख में।
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सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट का नया दौर


नई दिल्ली: सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है, और मंगलवार, 30 जून 2026 को निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिला। अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजार खुलते ही, दोनों कीमती धातुओं के दाम में तेज गिरावट आई है। वैश्विक आर्थिक हालात, पश्चिम एशिया में हो रहे परिवर्तनों और अमेरिकी बाजार से जुड़े संकेतों के कारण निवेशकों का रुख बदलता नजर आ रहा है। ऐसे में सोना-चांदी खरीदने की योजना बना रहे लोगों की नजरें अब बाजार की अगली चाल पर टिकी हुई हैं।


अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी की कीमतें

अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी एक्सचेंज कॉमेक्स (COMEX) में मंगलवार सुबह सोने की कीमत में 1.44 प्रतिशत की गिरावट आई, जिससे सोने का भाव 3,980.70 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। चांदी की कीमत में भी कमी आई, जो 1.46 प्रतिशत गिरकर 57.325 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी। उल्लेखनीय है कि 29 जनवरी 2026 को सोना 5,600 डॉलर प्रति औंस के उच्चतम स्तर पर पहुंचा था, जबकि चांदी ने भी 121 डॉलर प्रति औंस का रिकॉर्ड बनाया था। वर्तमान कीमतें इन उच्चतम स्तरों से काफी नीचे हैं।


घरेलू बाजार में कीमतों का हाल

घरेलू वायदा बाजार एमसीएक्स (MCX) में भी सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट आई है। 29 जनवरी को सोना 1,80,000 रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी 4,20,000 रुपये प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी। वहीं, सोमवार को सोने का भाव 1,42,413 रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी की कीमत 2,23,000 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज की गई। यह स्पष्ट है कि दोनों कीमती धातुएं अपने उच्चतम स्तर से काफी नीचे कारोबार कर रही हैं।


कीमतों में गिरावट के कारण

विशेषज्ञों का मानना है कि सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट के पीछे कई वैश्विक कारण हैं। पश्चिम एशिया में बदलते हालात का सबसे बड़ा असर देखा जा रहा है, जिससे कमोडिटी बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। इसके अलावा, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी की आशंका ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो डॉलर मजबूत होता है, जिससे सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ता है।


निवेश के लिए सही समय?

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि गिरावट के इस दौर में खरीदारी के अवसर बन सकते हैं, लेकिन निवेश करते समय सावधानी बरतना आवश्यक है। यदि आपका लक्ष्य दीर्घकालिक निवेश है, तो मौजूदा स्तर पर धीरे-धीरे खरीदारी करना एक बेहतर रणनीति हो सकती है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि पूरी राशि एक साथ निवेश करने के बजाय हर गिरावट पर थोड़ा-थोड़ा निवेश करना अधिक सुरक्षित है। इससे बाजार में उतार-चढ़ाव का जोखिम कम हो जाता है।


भारतीय बाजार में खरीदारी का रुझान

सोने और चांदी की कीमतों में आई गिरावट का असर भारतीय बाजार में भी देखा जा रहा है। हाल के समय में खरीदारी का रुझान पहले की तुलना में कम हुआ है। कई लोग पहले खरीदे गए सोने की बिक्री भी कर रहे हैं। फिलहाल, बाजार की अगली दिशा वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, डॉलर की चाल, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के निर्णयों और पश्चिम एशिया के घटनाक्रम पर निर्भर करेगी। ऐसे में निवेशकों को जल्दबाजी में निर्णय लेने के बजाय बाजार पर नजर रखने और सोच-समझकर निवेश करने की सलाह दी जा रही है।