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सौरव गांगुली ने ममता बनर्जी के राजनीतिक भविष्य पर उठे सवालों का किया खंडन

पश्चिम बंगाल की राजनीति में हालिया हलचल के बीच, सौरव गांगुली ने ममता बनर्जी के राजनीतिक भविष्य पर उठे सवालों का खंडन किया है। एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि ममता उपचुनाव के जरिए संसद में लौटने की योजना बना रही हैं, जिसमें गांगुली की भूमिका भी शामिल थी। जानें इस विवाद की पूरी कहानी और टीएमसी के आंतरिक संकट के बारे में।
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सौरव गांगुली ने ममता बनर्जी के राजनीतिक भविष्य पर उठे सवालों का किया खंडन

कोलकाता में राजनीतिक हलचल


कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों अटकलों का दौर चल रहा है। हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने प्रतिद्वंद्वी सुवेंदु अधिकारी के हाथों अपनी पारंपरिक सीट खो दी, जिससे उनके राजनीतिक भविष्य पर सवाल उठने लगे हैं। इसी बीच, एक स्थानीय समाचार पत्र की रिपोर्ट ने सौरव गांगुली का नाम जोड़कर स्थिति को और भी संवेदनशील बना दिया। हालांकि, गांगुली ने शनिवार को इन आरोपों का खंडन किया।


ममता बनर्जी की संसद में एंट्री की योजना

विवाद की जड़ उस रिपोर्ट में है, जिसमें कहा गया था कि ममता बनर्जी उपचुनाव के माध्यम से संसद में अपनी उपस्थिति बनाए रखने की योजना बना रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस (TMC) की नजर मुर्शिदाबाद जिले की बहरामपुर लोकसभा सीट पर है, जहां पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान वर्तमान सांसद हैं। पठान ने 2024 के चुनाव में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी को हराया था।


बहरामपुर सीट पर टीएमसी की रणनीति

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि टीएमसी बहरामपुर को ममता बनर्जी के लिए एक सुरक्षित चुनावी क्षेत्र मानती है। इस क्षेत्र में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या लगभग 50 से 52 प्रतिशत है, जो पारंपरिक रूप से टीएमसी का मजबूत वोट बैंक हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि इसी कारण पार्टी ने यूसुफ पठान को इस्तीफा देने के लिए मनाने की योजना बनाई थी, ताकि ममता बनर्जी इस सीट पर चुनाव लड़ सकें।


गांगुली की भूमिका पर सवाल

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि यूसुफ पठान को इस्तीफा देने के लिए मनाने में सौरव गांगुली की मदद ली गई थी। यह दावा किया गया कि गांगुली को खेल जगत के अपने संबंधों का हवाला देकर पठान तक 'दीदी' का संदेश पहुंचाने के लिए चुना गया। इस खबर ने बंगाल के खेल और राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी।


टीएमसी में बगावत और गांगुली का स्पष्टीकरण

यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब टीएमसी अपने सबसे बड़े आंतरिक संकट का सामना कर रही है। सूत्रों के अनुसार, पार्टी के लगभग 23 लोकसभा सांसद रताब्रता बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट के संपर्क में हैं। इस राजनीतिक दबाव के बीच, सौरव गांगुली ने एक विस्तृत बयान जारी करते हुए इन सभी दावों को निराधार और असत्य बताया, जिससे इस विवाद पर विराम लग गया।