स्कॉलरशिप भुगतान में देरी: सरकार ने बताई मुख्य वजहें और उठाए कदम
स्कॉलरशिप का महत्व और देरी की समस्या
आर्थिक रूप से कमजोर अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), आर्थिक रूप से पिछड़ा वर्ग (EBC) और विमुक्त, घुमंतू तथा अर्ध-घुमंतू जनजातियों (DNT) के लाखों छात्रों के लिए प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप एक महत्वपूर्ण सहारा है। हर साल, कई छात्र यह शिकायत करते हैं कि उनकी स्कॉलरशिप की राशि समय पर उनके बैंक खातों में नहीं पहुंचती। इसी संदर्भ में, संसद में सरकार से यह सवाल उठाया गया कि भुगतान में देरी का कारण क्या है और इसे रोकने के लिए क्या उपाय किए जा रहे हैं।
सरकार की प्रतिक्रिया
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने संसद में स्वीकार किया कि स्कॉलरशिप में देरी के पीछे कई प्रशासनिक और तकनीकी कारण हैं। सरकार का कहना है कि केवल फंड जारी करने में देरी ही इसका कारण नहीं है। इसमें राज्य सरकारों की प्रक्रियाएं, राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल (NSP), आधार का बैंक खातों से लिंक होना और आवश्यक दस्तावेजों का समय पर जमा न होना भी शामिल हैं।
छात्रों को मिलने वाला लाभ
सरकार के अनुसार, वर्ष 2023-24 में प्री-मैट्रिक स्कॉलरशिप का लाभ 18.43 लाख और पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप का लाभ 27.16 लाख छात्रों को मिला। इसके बाद, 2024-25 में प्री-मैट्रिक के लाभार्थियों की संख्या बढ़कर 20.61 लाख हो गई, जबकि पोस्ट-मैट्रिक के 24.53 लाख छात्रों को स्कॉलरशिप मिली। 2025-26 के अनुमान के अनुसार, प्री-मैट्रिक के 29.81 लाख और पोस्ट-मैट्रिक के 33.93 लाख छात्रों को छात्रवृत्ति मिलने की उम्मीद है। यह दर्शाता है कि हर साल इन योजनाओं का दायरा बढ़ रहा है।
स्कॉलरशिप में देरी के चार प्रमुख कारण
सरकार ने संसद में बताया कि स्कॉलरशिप राशि में देरी के चार मुख्य कारण हैं। पहला, कई राज्य और केंद्रशासित प्रदेश समय पर अपने प्रस्ताव केंद्र सरकार को नहीं भेजते। दूसरा, पहले मिली राशि का उपयोग प्रमाणपत्र (Utilisation Certificate) समय पर जमा नहीं किया जाता। तीसरा, कई राज्यों में राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल (NSP) अभी पूरी तरह से नहीं जुड़ा है। चौथा, कई छात्रों के बैंक खाते आधार से लिंक नहीं होने के कारण डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए पैसा उनके खाते में नहीं पहुंच पाता।
सरकार के उठाए गए कदम
सरकार का कहना है कि सभी राज्यों को राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल (NSP) से जोड़ा जा रहा है। अब स्कॉलरशिप की पूरी राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से सीधे छात्रों के बैंक खातों में भेजी जाएगी। इसके साथ ही, राज्यों के साथ नियमित समीक्षा बैठकें आयोजित की जा रही हैं, ताकि प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके। सरकार ने राज्यों को निर्देश दिए हैं कि वे समय पर अपने प्रस्ताव और उपयोग प्रमाणपत्र भेजें, जिससे स्कॉलरशिप जारी करने में कोई देरी न हो।
