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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने राम मंदिर ट्रस्ट और जांच पर उठाए सवाल

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सीतापुर में राम मंदिर ट्रस्ट और एसआईटी जांच पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जब जांच उसी व्यवस्था के तहत हो रही है, जिस पर आरोप हैं, तो निष्पक्षता की बात करना जनता को गुमराह करने जैसा है। उन्होंने चंपत राय के इस्तीफे को अस्थायी समाधान बताया और कहा कि भविष्य में राम मंदिर से जुड़ी अन्य गड़बड़ियां भी सामने आ सकती हैं। जानें उनके बयान के पीछे की पूरी कहानी।
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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का बयान


सीतापुर। उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने मंगलवार सुबह लगभग 9 बजे अपनी विधानसभा यात्रा के दौरान अयोध्या राम मंदिर से संबंधित कथित चंदा चोरी मामले, एसआईटी जांच और राम मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर अपने विचार साझा किए। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट और जांच एजेंसी दोनों ही सरकार के अधीन हैं। ऐसे में डबल इंजन सरकार में निष्पक्ष जांच की बात करना जनता को गुमराह करने जैसा है।


स्वामी ने सवाल उठाया कि जब किसी मामले की जांच उसी व्यवस्था के तहत हो रही है, जिस पर आरोप हैं, तो लोगों में स्वाभाविक रूप से संदेह उत्पन्न होगा। उन्होंने चंपत राय के इस्तीफे को स्वीकार करने और एसआईटी जांच की दिशा पर भी सवाल उठाए। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने राम मंदिर की स्थापना प्रक्रिया पर टिप्पणी करते हुए कहा कि धर्म और शास्त्रों की अवहेलना उचित नहीं है। उनका कहना था कि जब धार्मिक परंपराओं और शास्त्रीय विधानों की अनदेखी होती है, तो इसके दुष्परिणाम सामने आते हैं।


उन्होंने कथित चंदा चोरी के मामले को इसी का उदाहरण बताते हुए कहा कि भविष्य में राम मंदिर से जुड़ी अन्य गड़बड़ियां भी सामने आ सकती हैं। स्वामी ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जहां भी राजनीतिक लाभ के लिए धर्म और शास्त्रों की अनदेखी होती है, वहां असुरी शक्तियां सक्रिय हो जाती हैं। मंदिर में केवल देवता की मूर्तियां दिखेंगी, लेकिन इसके दुष्परिणाम सामने आते रहेंगे।


चंपत राय का इस्तीफा एक अस्थायी समाधान है


स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि हम उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों में जाकर जनता से संवाद करने का प्रयास कर रहे हैं, और हमारा उद्देश्य गौ माता की रक्षा करना है। उन्होंने लोगों से कहा कि आगामी चुनाव में क्या वे गौ माता की रक्षा के लिए संकल्प लेना चाहेंगे। लाखों लोगों ने इस संकल्प को स्वीकार किया है। चंपत राय का इस्तीफा केवल आग पर छींटा मारने का काम कर रहा है ताकि थोड़ी सी लौ कम हो जाए। जब इस्तीफे के कागजात सामने नहीं आए और उन्होंने इस्तीफा स्वीकार भी कर लिया, तब भी आस्था पर जो चोट लगी है, उसे भरने में समय लगेगा। जिन लोगों को नियुक्त किया गया है, उनका चरित्र भी कुछ खास नहीं है। वे भी तो आपके कार्यकर्ता हैं और जिन्हें हटाया गया है, उन्हें अब किसी और काम में लगा दिया जाएगा। ब्रजभूषण सिंह ने पहले ही समझ लिया था कि मंदिर में कुछ ठीक नहीं हो रहा।