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हरिद्वार में 70 साल बाद परिवार को मिली जमीन का अधिकार, सुप्रीम कोर्ट का फैसला

हरिद्वार के एक परिवार को 70 साल बाद सुप्रीम कोर्ट से अपनी खरीदी हुई जमीन का अधिकार मिला है। यह मामला चार पीढ़ियों के संघर्ष का प्रतीक बन गया है, जिसमें परिवार ने निचली अदालत से लेकर उच्च न्यायालय तक न्याय की गुहार लगाई। इस फैसले ने न केवल परिवार को राहत दी, बल्कि गांव में विकास कार्यों को भी गति दी। जानें इस अद्भुत कहानी के बारे में।
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सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला


नई दिल्ली। सोचिए, यदि आप आज कोई संपत्ति खरीदते हैं और उसका स्वामित्व आपके पोते या परपोते को मिलता है, तो कैसा अनुभव होगा? उत्तराखंड के हरिद्वार से एक ऐसा मामला सामने आया है, जहां एक परिवार को अपनी खरीदी हुई भूमि का अधिकार पाने के लिए 70 वर्षों तक कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी।


यह मामला हरिद्वार के नसीरपुर कला गांव का है, जहां शराफत अली के पूर्वजों ने 1957 में लगभग 15 बीघा भूमि खरीदी थी। लेकिन कुछ समय बाद ही यह भूमि चकबंदी और राजस्व रिकॉर्ड के विवाद में फंस गई। धीरे-धीरे यह मामला इतना जटिल हो गया कि कई लोग इस भूमि पर दावा करने लगे, जिसके कारण परिवार को अदालत का सहारा लेना पड़ा।


चार पीढ़ियों का संघर्ष


यह विवाद इतना लंबा चला कि मुकदमा शुरू करने वाली दो पीढ़ियां इस दुनिया से चली गईं। इसके बाद तीसरी और चौथी पीढ़ी ने इस कानूनी लड़ाई को आगे बढ़ाया। परिवार ने निचली अदालत से लेकर उच्च न्यायालय तक न्याय की गुहार लगाई, लेकिन सफलता नहीं मिली। अंततः मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। लगभग सात दशकों की लंबी सुनवाई के बाद, सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने परिवार के पक्ष में फैसला सुनाया और उन्हें उनकी भूमि का अधिकार वापस दिलाया।


सरकारी रिकॉर्ड में नाम की अनुपस्थिति


परिवार के अनुसार, चकबंदी प्रक्रिया के दौरान उन्हें पता चला कि सरकारी रिकॉर्ड में उनका नाम दर्ज नहीं था और भूमि अब भी विक्रेता के नाम पर थी। कई बार समझौते की कोशिशें भी की गईं, लेकिन विवाद का समाधान नहीं निकल सका।


गांव में खुशी का माहौल


करीब 70 साल बाद आए इस फैसले से परिवार में खुशी का माहौल है। गांव के लोगों का कहना है कि भूमि विवाद के कारण कई विकास कार्य प्रभावित हो रहे थे। यहां तक कि स्कूल जाने वाले बच्चों का रास्ता भी इस विवाद के कारण बंद हो गया था, जिससे उन्हें अन्य रास्तों से जाना पड़ता था। यह मामला केवल एक भूमि विवाद नहीं, बल्कि न्याय के लिए चार पीढ़ियों तक चले संघर्ष और धैर्य की एक अद्भुत कहानी बन गया है।