हरिद्वार में विश्व का सबसे बड़ा पारद शिवलिंग स्थापित
हरिद्वार में पारद शिवलिंग की प्राण प्रतिष्ठा
उत्तराखंड: हरिद्वार के बहदराबाद टोल प्लाजा के निकट श्री साई शिव गंगा धाम में पारद शिवलिंग की प्राण प्रतिष्ठा का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में वैदिक मंत्रों का उच्चारण किया गया और कई साधु संत भी उपस्थित रहे। दावा किया गया है कि यह विश्व का सबसे बड़ा पारद शिवलिंग है, जिसका वजन 5211 किलोग्राम है। प्राण प्रतिष्ठा के साथ संत समागम का आयोजन भी किया गया। यह पारद शिवलिंग लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड और एशियन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हो चुका है।
साईं शिव गंगा धाम में इस शिवलिंग की स्थापना की गई है। चूंकि यह शिवलिंग पारे (पारद) धातु से निर्मित है, इसे पारदेश्वर शिवलिंग के नाम से जाना जाता है। इसका निर्माण कार्य 2021 में शुरू हुआ था, जिसमें दक्षिण के ब्राह्मणों और कारीगरों ने पारा धातु एकत्रित कर इसे तैयार किया। उद्योगपति और श्री साईं शिव गंगा धाम के प्रबंध ट्रस्टी राजीव बंसल ने इस धाम का निर्माण कराया है। धाम में एक विशाल हॉल में साईं बाबा की मूर्ति स्थापित की गई है, जिसके सामने पारदेश्वर शिवलिंग रखा गया है।
इस शिवलिंग के साथ ब्रह्मा, विष्णु, महेश और लक्ष्मी गणेश समेत अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियाँ भी स्थापित की गई हैं। पारे और ध्यान के वैज्ञानिक संबंधों को दर्शाते हुए यह शिवलिंग पारे धातु से बनाया गया है। इसकी निर्माण में करोड़ों रुपये खर्च हुए हैं, हालांकि ट्रस्टियों ने इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी। पारा धातु का घनत्व अधिक होने के कारण इसका वजन भी ज्यादा है। दक्षिण के ब्राह्मणों ने भगवान शिव की कथाओं और महिमा का वर्णन किया है।
पारदेश्वर महादेव की महिमा का वर्णन करते हुए मुख्य ट्रस्टी राजीव बंसल ने कहा कि शास्त्रों में पारद शिवलिंग को चमत्कारिक और कल्याणकारी माना गया है। विश्व के सबसे बड़े पारदेश्वर महादेव की स्थापना मानव कल्याण, विश्व शांति और सनातन संस्कृति के संरक्षण के उद्देश्य से की गई है। उन्होंने बताया कि यह शिवलिंग लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड और एशियन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हो चुका है।
ट्रस्टियों को सर्टिफिकेट भी मिल चुका है और गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज कराने की प्रक्रिया चल रही है। आने वाले समय में श्री साईं शिव गंगा धाम देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रमुख केंद्र बनेगा। निरंजन पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज ने कहा कि पारे को बांधकर शिवलिंग का रूप देना ऋषियों की रस विद्या का चमत्कार है। उन्होंने कहा कि यह विश्व का सबसे बड़ा पारद शिवलिंग है। कांवड़ मेले में लाखों शिवभक्त इस शिवलिंग के दर्शन के लिए आएंगे।
इस अवसर पर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वश्रम महाराज ने कहा कि भगवान शिव संपूर्ण सृष्टि के कल्याण के प्रतीक हैं। पारदेश्वर महादेव की स्थापना मानवता के आध्यात्मिक उत्थान और विश्व शांति का दिव्य अभियान है। जूना पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी महाराज ने कहा कि पारद शिवलिंग की उपासना से कलियुग में शीघ्र फल प्राप्त होता है। यह शिवलिंग रोग, शोक और दरिद्रता का नाश करने वाला है।
साध्वी ऋतम्भरा दीदी ने नारी शक्ति और राष्ट्र निर्माण पर ओजस्वी उद्बोधन दिया। उन्होंने कहा कि शिव ही सत्य हैं, शिव ही सुंदर हैं। पारदेश्वर महादेव की स्थापना से हरिद्वार की महिमा और बढ़ेगी। महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रविन्द्र पुरी महाराज ने कहा कि भगवान शिव का अलौकिक आशीर्वाद है। विश्व हिंदू परिषद के संरक्षक दिनेश चंद्र ने कहा कि भारत की सनातन परंपरा विश्व की सबसे प्राचीन और वैज्ञानिक संस्कृति है।
