हरियाणा में 5,000 मौतों के कारणों की जांच के लिए सर्वेक्षण शुरू
हरियाणा सरकार की नई पहल
हरियाणा सरकार ने रोहतक में हाल ही में हुई 5,000 मौतों के कारणों की जांच करने का निर्णय लिया है। इसके तहत, मृतकों के परिवारों से बातचीत कर उनकी मौत से पहले के लक्षण, बीमारियों, उपचार और अन्य परिस्थितियों की जानकारी एकत्र की जाएगी। इसके बाद, मेडिकल अधिकारी इन जानकारियों का विश्लेषण कर संभावित कारणों का निर्धारण करेंगे।
रोहतक को पायलट जिला के रूप में चुना गया
यह परियोजना आईसीएमआर के वित्तीय सहयोग से चल रही मौखिक शव-परीक्षण (वर्बल ऑटोप्सी) योजना का हिस्सा है। इसे एम्स, नई दिल्ली के सहयोग से हरियाणा स्वास्थ्य विभाग द्वारा लागू किया जाएगा। रोहतक को इस परियोजना के लिए पायलट जिला के रूप में चुना गया है।
परियोजना की अवधि
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि यह परियोजना लगभग आठ महीने तक चलेगी। इस दौरान लगभग 5,000 मौतों का सर्वेक्षण किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी पहले योग्य मौतों की पहचान करेंगे, और फिर कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर मृतकों के परिवारों से आवश्यक जानकारी एकत्र करेंगे।
मौतों के कारणों की पहचान
इस सर्वेक्षण के माध्यम से यह स्पष्ट होगा कि रोहतक में मौतें किन कारणों और परिस्थितियों के चलते अधिक हो रही हैं। इससे स्वास्थ्य विभाग को बीमारियों की रोकथाम और उपचार से संबंधित योजनाओं की प्राथमिकताएं तय करने में मदद मिलेगी।
जानकारी का रिकॉर्डिंग ऐप में
मृतकों के परिवारों से बातचीत का डेटा एम्स द्वारा प्रदान किए गए मोबाइल ऐप में दर्ज किया जाएगा। स्वास्थ्य कर्मचारियों को इस प्रक्रिया के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। बातचीत में मौत से पहले की बीमारियों, लक्षणों, उपचार और अन्य परिस्थितियों की जानकारी ली जाएगी, जिसे मेडिकल अधिकारी निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार समीक्षा करेंगे।
