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हरियाणा में अस्पताल ने आयुष्मान कार्ड धारक से वसूले 7.25 लाख, उपभोक्ता अदालत ने सुनाया बड़ा फैसला

हरियाणा में एक अस्पताल ने आयुष्मान कार्ड धारक से 7.25 लाख रुपये की भारी राशि वसूली, जबकि मरीज की जान नहीं बचाई जा सकी। उपभोक्ता अदालत ने इस मामले में कड़ा फैसला सुनाते हुए अस्पताल को पैसे लौटाने और मुआवजा देने का आदेश दिया है। यह मामला उन लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण है जो मुफ्त इलाज की उम्मीद रखते हैं। जानें इस मामले की पूरी कहानी और अदालत के फैसले के पीछे की वजहें।
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हरियाणा में अस्पताल ने आयुष्मान कार्ड धारक से वसूले 7.25 लाख, उपभोक्ता अदालत ने सुनाया बड़ा फैसला

हरियाणा में अस्पताल की मनमानी का मामला

चरखी दादरी: हरियाणा से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जो आयुष्मान भारत योजना के तहत मुफ्त चिकित्सा की उम्मीद रखने वालों के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन गई है। एक निजी अस्पताल की मनमानी का शिकार हुए परिवार ने हार नहीं मानी और लंबी कानूनी लड़ाई के बाद अस्पताल को झुकने पर मजबूर कर दिया। अस्पताल ने आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद एक गरीब मरीज से 7.25 लाख रुपये की बड़ी राशि वसूल की थी। दुख की बात यह है कि इतनी राशि खर्च करने के बाद भी मरीज की जान नहीं बचाई जा सकी। अब उपभोक्ता अदालत ने अस्पताल की इस लूट पर कड़ी फटकार लगाते हुए लाखों रुपये लौटाने और जुर्माना भरने का आदेश दिया है।


इलाज के नाम पर लूट और मरीज की दर्दनाक मौत

जानकारी के अनुसार, 12 जून 2024 को एक महिला के पति को पेट दर्द और सांस लेने में कठिनाई के कारण रोहतक के पॉजिट्रॉन अस्पताल में भर्ती कराया गया था। मरीज और उसकी पत्नी आयुष्मान भारत योजना के लाभार्थी थे, जिसमें उन्हें 5 लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज की सुविधा मिलनी थी। इसके बावजूद, अस्पताल प्रबंधन ने महिला से 7.25 लाख रुपये की राशि यह कहकर वसूल की कि अप्रूवल मिलने के बाद पैसे वापस कर दिए जाएंगे। पति की जान बचाने के लिए मजबूर पत्नी ने रिश्तेदारों से कर्ज लेकर बिल चुकाया, लेकिन इलाज के बावजूद 26 जून को मरीज की मृत्यु हो गई।


अस्पताल ने रिफंड से किया इनकार

पति की मृत्यु के बाद जब पीड़ित महिला ने अस्पताल से 5 लाख रुपये के रिफंड की मांग की, तो अस्पताल ने पैसे लौटाने से साफ मना कर दिया। अस्पताल ने तर्क दिया कि मरीज 'एक्यूट गैस्ट्रोएंटेराइटिस' और 'सेप्सिस' से पीड़ित था, जिसका इलाज इस योजना के तहत कवर नहीं होता। अस्पताल का कहना था कि वे आयुष्मान योजना के तहत केवल हृदय रोग के लिए पैनल में शामिल हैं और परिजनों की सहमति के बाद ही मरीज को 'कैश पेशेंट' के रूप में भर्ती किया गया था।


उपभोक्ता अदालत का बड़ा फैसला

चरखी दादरी जिला उपभोक्ता आयोग ने मामले की गहराई से सुनवाई करते हुए अस्पताल की सभी दलीलों को खारिज कर दिया। आयोग ने पाया कि अस्पताल ऐसा कोई भी पुख्ता सबूत पेश करने में नाकाम रहा जो यह साबित करे कि मरीज का इलाज आयुष्मान योजना के दायरे से बाहर था। अदालत ने स्पष्ट किया कि अस्पताल और प्राधिकरण के बीच हुए समझौते में चिकित्सा उपचार का दायरा बहुत व्यापक है और यह केवल हृदय रोगों तक सीमित नहीं है। अदालत ने कहा कि एक योग्य लाभार्थी से इतनी बड़ी राशि वसूलना सेवा में कमी है और इस रवैये ने कल्याणकारी योजना के मूल उद्देश्य को खत्म कर दिया है।


विधवा पत्नी को मिलेगा मुआवजा

उपभोक्ता अदालत ने गरीब और बेसहारा महिला के हक में कड़ा फैसला सुनाते हुए पॉजिट्रॉन अस्पताल को तुरंत प्रभाव से पैसे लौटाने के निर्देश दिए हैं। अदालत के आदेशानुसार, अस्पताल को अब इलाज के नाम पर वसूली गई अतिरिक्त राशि के रूप में 5 लाख रुपये का पूरा रिफंड देना होगा। इसके साथ ही महिला को मानसिक उत्पीड़न और भावनात्मक आघात के लिए 50,000 रुपये का मुआवजा और अदालती कार्यवाही के खर्च के तौर पर 10,000 रुपये अलग से चुकाने होंगे। कुल मिलाकर अब अस्पताल को 5.60 लाख रुपये का भुगतान करना होगा, जो मरीजों को लूटने वाले अस्पतालों के लिए एक सख्त चेतावनी है।