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हरियाणा में जल प्रबंधन पर चर्चा: इंडिया इंटरनेशनल वाटर वीक-2026 में महत्वपूर्ण पहल

इंडिया इंटरनेशनल वाटर वीक-2026 में हरियाणा के जल प्रबंधन पर महत्वपूर्ण चर्चा हुई। डॉ. सतबीर सिंह कादियान ने प्रदेश में जल संरक्षण के प्रयासों की जानकारी दी। इस कार्यक्रम में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों और किशाऊ समझौते के महत्व पर भी चर्चा की गई। जानें कैसे हरियाणा जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन के लिए कदम उठा रहा है।
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इंडिया इंटरनेशनल वाटर वीक-2026 का आयोजन

भारत मंडपम में आयोजित 9वें इंडिया इंटरनेशनल वाटर वीक-2026 के दौरान हरियाणा के जल संरक्षण और प्रबंधन के प्रयासों पर चर्चा की गई। इस अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में हरियाणा के इंजीनियर-इन-चीफ और प्रमुख निदेशक डॉ. सतबीर सिंह कादियान ने प्रदेश में जल बचाने और संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए किए गए कार्यों की जानकारी साझा की। जल शक्ति मंत्री सी आर पाटिल के नेतृत्व में इस आयोजन का उद्घाटन भारत के उपराष्ट्रपति ने किया।


जल प्रबंधन की थीम

इस वर्ष के इंडिया इंटरनेशनल वाटर वीक की थीम 'क्लाइमेट रेजिलिएंट वाटर मैनेजमेंट' है, जिसका अर्थ है बदलते जलवायु के बीच पानी का प्रभावी प्रबंधन। इस कार्यक्रम में देश-विदेश के विशेषज्ञ, विभिन्न राज्यों के अधिकारी और जल क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधि शामिल हुए। जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन पर विस्तृत चर्चा की गई।


हरियाणा में जल प्रबंधन की पहल

डॉ. सतबीर सिंह कादियान ने बताया कि हरियाणा में पानी बचाने और उसके सही उपयोग पर जोर दिया जा रहा है। प्रदेश में नहरों को मजबूत करने, जल निकायों के सुधार, भूजल स्तर को बढ़ाने, बारिश के पानी को संचित करने और उपचारित पानी के पुनः उपयोग जैसे कार्य किए जा रहे हैं।


सरकार की सराहना

डॉ. कादियान ने प्रदेश में जल संसाधनों के विकास का श्रेय मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और सिंचाई एवं जल संसाधन मंत्री श्रुति चौधरी को दिया। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता और विभाग के अधिकारियों की मेहनत से हरियाणा जल प्रबंधन में प्रगति कर रहा है। पानी की बढ़ती जरूरत को देखते हुए जल संरक्षण और सिंचाई व्यवस्था को सुधारना आवश्यक है।


किशाऊ समझौते का महत्व

कार्यक्रम में 15 सितंबर 2026 को हुए किशाऊ समझौते का भी उल्लेख किया गया। यह समझौता हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली के बीच जल प्रबंधन में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। किशाऊ परियोजना टोंस नदी पर प्रस्तावित है, जिससे सिंचाई और बिजली उत्पादन के साथ-साथ कई राज्यों को जल संबंधी लाभ मिलने की उम्मीद है।


हरियाणा की पहचान

इंडिया इंटरनेशनल वाटर वीक में हरियाणा की प्रस्तुति ने प्रदेश के जल प्रबंधन के कार्यों को देश-विदेश के प्रतिनिधियों के समक्ष रखा। जलवायु परिवर्तन के कारण सूखे और बाढ़ जैसी समस्याओं के बीच पानी का सही उपयोग और संरक्षण आवश्यक हो गया है। डॉ. कादियान ने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के लिए पानी की बचत और प्रबंधन हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।