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हरियाणा में डिजिटल क्रांति: भारतनेट परियोजना का विस्तार

हरियाणा सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल क्रांति लाने के लिए भारतनेट परियोजना का विस्तार किया है। चंडीगढ़ में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में बताया गया कि 82.84 प्रतिशत ग्राम पंचायतों को सफलतापूर्वक जोड़ा गया है। इसके साथ ही, 150 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन पैकेज भी घोषित किया गया है, जो दूरसंचार क्षेत्र में सुधार लक्ष्यों को पूरा करने पर निर्भर करेगा। जानें इस परियोजना के तहत और क्या-क्या योजनाएं बनाई गई हैं और कैसे यह ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी को बढ़ावा देगा।
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हरियाणा भारतनेट परियोजना

हरियाणा भारतनेट परियोजना: हरियाणा सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों को डिजिटल युग से जोड़ने और टेलीकॉम ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। चंडीगढ़ में मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में आयोजित राज्य ब्रॉडबैंड समिति की बैठक में बताया गया कि राज्य की 6,222 ग्राम पंचायतों में से 5,154, जो कि 82.84 प्रतिशत हैं, को भारतनेट से सफलतापूर्वक जोड़ा गया है। इसके अलावा, गांवों में 45,130 फाइबर टू द होम (FTTH) कनेक्शन पूरी तरह से कार्यरत हैं।


हाई-स्पीड इंटरनेट कनेक्टिविटी की समीक्षा

बैठक में पंचकूला, करनाल, हिसार और रोहतक सहित सभी जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों में हाई-स्पीड इंटरनेट कनेक्टिविटी की स्थिति की समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने शेष 1,068 ग्राम पंचायतों को जल्द से जल्द ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क से जोड़ने और 62,220 के निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले बाकी बचे FTTH कनेक्शन को तुरंत चालू करने के निर्देश दिए।


150 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन पैकेज

केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 'राज्यों को पूंजी निवेश हेतु विशेष सहायता योजना' के तहत हरियाणा के लिए 150 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन फंड निर्धारित किया है। यह राशि दूरसंचार क्षेत्र में निर्धारित छह सुधार लक्ष्यों को पूरा करने पर चरणबद्ध तरीके से जारी की जाएगी।


RoW नियमों में तेजी और 'इन्वेस्ट हरियाणा' पोर्टल

मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि दूरसंचार बुनियादी ढांचे से संबंधित सभी स्वीकृतियों को पूरी तरह से डिजिटल रखा जाए। राज्य सरकार ने 'इन्वेस्ट हरियाणा' पोर्टल को RoW नियम, 2024 और भारतनेट की आधुनिक आवश्यकताओं के अनुसार अपग्रेड किया है।


जिलों में डीसी संभालेंगे कमान

जमीनी स्तर पर टेलीकॉम ढांचा स्थापित करने और शिकायतों के निपटारे के लिए जिला उपायुक्तों की अध्यक्षता में जिला स्तरीय दूरसंचार समितियों को सक्रिय किया गया है। इन समितियों की हर तीन महीने में अनिवार्य बैठक होगी, ताकि स्थानीय विवादों का त्वरित समाधान किया जा सके।