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हरियाणा में मानसून की कमी से किसानों की चिंताएं बढ़ीं

हरियाणा में इस वर्ष मानसून की बारिश में 35% की कमी आई है, जिससे किसानों की सिंचाई में कठिनाई हो रही है। कुछ जिलों में बारिश सामान्य से अधिक हुई है, जबकि अन्य में स्थिति चिंताजनक है। मौसम विभाग ने आगामी दिनों में हल्की बौछारों की संभावना जताई है, लेकिन भारी बारिश का कोई अलर्ट नहीं है। जानें और क्या कहता है मौसम विभाग।
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मानसून में बारिश में कमी


इस वर्ष मानसून में 35% की कमी, किसानों को सिंचाई में कठिनाई


हरियाणा मौसम (चंडीगढ़): इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून की शुरुआत में देरी हुई है और अब एक बार फिर से इसकी गतिविधियों में कमी आई है। पूरे प्रदेश में मानसून की अच्छी बारिश की आवश्यकता बनी हुई है। अब तक हुई बारिश एकसाथ नहीं हुई है।


बारिश के छोटे-छोटे टुकड़ों के कारण सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पाया है। भारतीय मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में अब तक लगभग 42 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य से 35% कम है। इससे किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं। अगले कुछ दिनों में तेज बारिश की कोई संभावना नहीं है, लेकिन मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि एक सप्ताह बाद मानसूनी प्रणाली फिर से सक्रिय हो सकती है।


कुछ जिलों में बारिश की स्थिति

उत्तर हरियाणा के कुछ जिलों में मानसून ने अच्छा प्रदर्शन किया है। यमुनानगर में सामान्य (95 मिमी) के मुकाबले 110 मिमी बारिश हुई है, जो 15% अधिक है। अंबाला में 105 मिमी और पंचकूला में 98 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई है, जो इन जिलों के औसत से अधिक है। हालांकि, पश्चिमी और दक्षिणी हरियाणा में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।


सिरसा में अब तक (औसत 35 मिमी) के मुकाबले केवल 8 मिमी बारिश हुई है, जो 77% की कमी दर्शाता है। फतेहाबाद में सामान्य से 60% कम (केवल 12 मिमी) और हिसार में सामान्य से 55% कम (करीब 18 मिमी) बारिश हुई है। भिवानी और महेंद्रगढ़ में भी बारिश के आंकड़े औसत से काफी पीछे हैं।


आज का मौसम

मौसम विभाग के अनुसार, आज प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बादल छाए रहेंगे और उत्तरी हरियाणा के कुछ स्थानों जैसे पंचकूला, यमुनानगर, अंबाला, कुरुक्षेत्र और करनाल में गरज-चमक के साथ हल्की बौछारें पड़ने की संभावना है। हालांकि, भारी बारिश का कोई अलर्ट नहीं है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अगले 2-3 दिनों तक मौसम ऐसा ही बना रहेगा।