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हरियाणा में मॉनसून की देरी से किसानों की फसल पर संकट

हरियाणा में मॉनसून की देरी ने किसानों की खरीफ फसल पर संकट खड़ा कर दिया है। इस वर्ष बुवाई में 23 प्रतिशत की कमी आई है, जिसका मुख्य कारण अत्यधिक गर्मी और मॉनसून की देरी है। मौसम विभाग का अनुमान है कि इस साल सामान्य से कम बारिश होगी, जिससे किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं। अल नीनो के प्रभाव से भी स्थिति और गंभीर हो सकती है। सरकार को किसानों की सहायता के लिए योजनाएं लागू करनी पड़ सकती हैं।
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मॉनसून पर निर्भरता

भारत में, विशेष रूप से हरियाणा में, कई किसान खरीफ फसल के लिए मॉनसून पर निर्भर हैं। इस वर्ष, मॉनसून कई राज्यों में देरी से आया है, जिसमें हरियाणा भी शामिल है। आमतौर पर, जून के अंत में मॉनसून की शुरुआत होती थी, लेकिन इस बार यह जुलाई के पहले सप्ताह में पहुंचा। इस देरी के कारण किसानों को फसल की बुवाई के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा है। खरीफ फसल की बुवाई में इस साल भारत में 23 प्रतिशत की कमी आई है, जिसका मुख्य कारण अत्यधिक गर्मी और मॉनसून की देरी है.


किसानों की चिंताएं

खरीफ फसल किसानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, खासकर उन किसानों के लिए जो अपनी आय के लिए केवल इसी फसल पर निर्भर करते हैं। इस वर्ष मॉनसून की देरी और मौसम विभाग के पूर्वानुमान ने किसानों की चिंताओं को बढ़ा दिया है। मौसम विभाग का अनुमान है कि इस साल सामान्य से कम बारिश होगी और गर्मी अधिक रहेगी, जिससे धान, कपास और सब्जियों की खेती करने वाले किसानों की चिंता बढ़ गई है.


बुवाई में कमी

एक रिपोर्ट के अनुसार, इस साल खरीफ फसल की बुवाई में पिछले वर्ष की तुलना में 23 प्रतिशत की कमी आई है, जिसका मुख्य कारण मॉनसून की देरी और उसकी कमजोरी है। जलाशयों में जल स्तर भी कम है, जिससे भविष्य में फसल उत्पादन और कृषि को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं.


कृषि मंत्रालय की रिपोर्ट

रिपोर्ट में बताया गया है कि इस बार केवल 182.72 लाख हेक्टेयर में बुवाई हुई है, जबकि पिछले साल इसी समय तक 236.46 लाख हेक्टेयर की बुवाई हुई थी। इस गिरावट का मुख्य कारण दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की धीमी शुरुआत है.


अल नीनो का खतरा

अल नीनो के कारण पूरी दुनिया चिंतित है। यह प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह के असामान्य रूप से गर्म होने की एक प्राकृतिक घटना है, जो वैश्विक मौसम चक्र को प्रभावित करती है। भारत में भी इसको लेकर चिंता बढ़ गई है, क्योंकि अल नीनो मॉनसून को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है.


कम बारिश की संभावना

मौसम विभाग ने बताया कि इस साल 24 जून तक देशभर में सामान्य से 42 प्रतिशत कम बारिश हुई है। मध्य भारत में बारिश की कमी सबसे अधिक है, जहां सामान्य स्तर से 59 प्रतिशत कम बारिश हुई है. पूर्वी और पूर्वोत्तर राज्यों में भी 41 प्रतिशत की कमी देखी गई है.


संकट की आशंका

मॉनसून के इस पैटर्न के कारण बुवाई और रोपाई में देरी हो रही है, जिसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ेगा। खाद्यान्न की मांग स्थिर रहने के कारण और उत्पादन में कमी के चलते महंगाई बढ़ने की संभावना है. कम उत्पादन का सीधा असर सप्लाई चेन पर पड़ेगा, जिससे किसानों की आय में कमी आएगी और खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ सकती हैं.


सरकार की भूमिका

भारत के किसान मॉनसून पर अत्यधिक निर्भर हैं, और कम बारिश एक बड़ा संकट बन सकती है। सरकारों को प्रभावित किसानों को राहत देने के लिए योजनाएं लागू करनी पड़ सकती हैं। इसके अलावा, कुछ किसानों को आय के लिए खेती के अलावा अन्य विकल्पों पर विचार करना पड़ सकता है.