हापुड़: आतंकियों के लिए नया सुरक्षित ठिकाना, युवाओं को गुमराह करने की साजिश का खुलासा
हापुड़ में संदिग्ध गतिविधियों का खुलासा
हापुड़। उत्तर प्रदेश का हापुड़ जिला इन दिनों सुरक्षा एजेंसियों की नजर में है। हाल ही में खुफिया विभागों और आतंकवाद निरोधक दस्ते की जांच में एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। यह शांत दिखने वाला जिला संदिग्धों और आतंकियों के लिए एक सुरक्षित ठिकाने में बदल रहा है। यहां शिक्षा और छोटे व्यवसायों की आड़ में देश विरोधी और असामाजिक तत्व, स्थानीय युवाओं को गुमराह कर हिंसक जिहाद की ओर धकेलने का प्रयास कर रहे हैं।
सुरक्षा विशेषज्ञों और पुलिस के अनुसार, हापुड़ में संदिग्ध गतिविधियों के बढ़ने के पीछे पांच प्रमुख कारण हैं—
1. दिल्ली-NCR के निकटता और अनुकूल भौगोलिक स्थिति
हापुड़ की भौगोलिक स्थिति इसे संदिग्धों के लिए बेहद अनुकूल बनाती है। दिल्ली और नोएडा-गाजियाबाद के निकट होने के कारण यहां आना-जाना आसान है। संदिग्ध तत्व दिल्ली में सुरक्षा एजेंसियों की नजरों से बचने के लिए हापुड़ को अपना ठिकाना बनाते हैं और यहीं से अपने नेटवर्क का संचालन करते हैं।
2. दुर्गम खादर क्षेत्र का लाभ
हापुड़ का एक बड़ा हिस्सा गंगा नदी के खादर से जुड़ा है। यह क्षेत्र घने जंगलों और कच्चे रास्तों से भरा है। इस दुर्गम भौगोलिक संरचना के कारण पुलिस और स्थानीय खुफिया इकाई के लिए संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखना चुनौतीपूर्ण हो रहा है, जिसका फायदा ये नेटवर्क उठाते हैं।
3. तालीम और मदरसों की आड़ में ब्रेनवॉश
जांच में यह सामने आया है कि बाहरी राज्यों से आने वाले संदिग्ध युवक स्थानीय धार्मिक शिक्षण संस्थानों में शिक्षक या छात्र के रूप में नामांकन कराते हैं। शुरुआत में वे सामान्य व्यवहार करते हैं, लेकिन धीरे-धीरे स्थानीय युवाओं के साथ नजदीकियां बढ़ाकर कट्टरपंथी विचारधाराओं का प्रचार करते हैं।
4. छोटे कारोबारों का मुखौटा
संदिग्ध तत्व कपड़े की फेरी, पंचर की दुकान या कबाड़ के काम जैसे छोटे धंधों का सहारा लेते हैं। एक सामान्य दुकानदार का मुखौटा होने के कारण पड़ोसियों और पुलिस को उन पर शक नहीं होता। इस कारोबार की आड़ में वे रात के समय सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड ऐप्स के जरिए पाकिस्तानी हैंडलर्स से संपर्क बनाए रखते हैं।
5. टेरर फंडिंग का डिजिटल नेटवर्क
हालिया घटनाओं में यह भी देखा गया है कि ये असामाजिक तत्व न केवल युवाओं को कट्टरपंथी बना रहे हैं, बल्कि धार्मिक चंदे के नाम पर धन भी इकट्ठा कर रहे हैं। इस रकम को डिजिटल ट्रांजैक्शन और हवाला के जरिए देश विरोधी गतिविधियों के लिए भेजा जा रहा है।
एजेंसियां सतर्क, धरपकड़ तेज
हापुड़ के बहादुरगढ़ और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों से जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े संदिग्धों की गिरफ्तारी के बाद यूपी पुलिस और केंद्रीय खुफिया एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। जिले में बिना पुलिस सत्यापन के रह रहे बाहरी लोगों की पहचान के लिए व्यापक तलाशी अभियान शुरू किया गया है। स्थानीय लोगों से भी अपील की गई है कि वे किसी भी संदिग्ध व्यक्ति या गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें ताकि उचित कार्रवाई की जा सके।
