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हिमाचल प्रदेश के मंदिरों में दान की सुरक्षा के लिए नए दिशा-निर्देश

हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य के मंदिरों में दान की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन दिशा-निर्देशों में दानपात्रों की सुरक्षा, नकदी और आभूषण की गिनती की प्रक्रिया, और डिजिटल दान को बढ़ावा देने के उपाय शामिल हैं। सरकार ने सभी मंदिरों को 30 दिन के भीतर अनुपालन रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है। जानें इन दिशा-निर्देशों का महत्व और कैसे ये श्रद्धालुओं के दान की सुरक्षा को बढ़ाएंगे।
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सरकार ने मंदिरों में दान की सुरक्षा बढ़ाने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए

शिमला: हिमाचल प्रदेश की सरकार ने राज्य के सरकारी मंदिरों में श्रद्धालुओं द्वारा दिए जाने वाले दान, नकद, आभूषण और अन्य मूल्यवान वस्तुओं की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। सभी उपायुक्तों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने जिलों में उन मंदिरों की सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत करें, जो सीधे जिला प्रशासन के नियंत्रण में नहीं हैं, लेकिन राज्य कानून के तहत स्थापित ट्रस्टों या समितियों द्वारा संचालित होते हैं। अन्य मंदिर प्रबंधन समितियों को भी बेहतर सुरक्षा उपायों को अपनाने के लिए प्रेरित किया गया है। सरकार ने कहा है कि हिमाचल देवभूमि है, जहां माता चिंतपूर्णी, नैना देवी, ज्वालाजी, ब्रजेश्वरी और बाबा बालक नाथ जैसे कई प्रसिद्ध मंदिर हैं। हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु किन्नौर कैलाश, मणिमहेश, श्रीखंड महादेव, लमदल और सरयोलसर जैसे तीर्थ स्थलों पर पहुंचते हैं और दान करते हैं। हाल ही में एक प्रमुख मंदिर में दान में चोरी और गड़बड़ी की खबरों के बाद यह कदम उठाया गया है।


दानपात्रों की सुरक्षा और निगरानी के लिए नए नियम


सरकार ने निर्देश दिए हैं कि सभी दानपात्रों को छेड़छाड़ से सुरक्षित रखा जाए और उन्हें मजबूती से स्थापित किया जाए। प्रत्येक दानपात्र को एक अलग पहचान संख्या दी जाएगी और उसकी चाबियां ड्यूल लॉक या मल्टी-की प्रणाली के तहत रखी जाएंगी। किसी भी मरम्मत या बदलाव का रिकॉर्ड रखा जाएगा। दानपात्र केवल निर्धारित तिथि पर अधिकृत समिति की उपस्थिति में खोले जाएंगे। दान की गिनती कार्यकारी अधिकारी, मंदिर अधिकारी, जिला प्रशासन के प्रतिनिधि, लेखा अधिकारी, मंदिर प्रबंधन समिति के प्रतिनिधि और स्वतंत्र गवाहों की उपस्थिति में की जाएगी। पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य होगी। गिनती कक्ष सीसीटीवी निगरानी में रहेगा और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी। मंदिर के प्रवेश और निकास द्वार, दानपात्र, गिनती कक्ष, ट्रेजरी, स्ट्रांग रूम और आभूषण रखने के स्थानों पर उच्च गुणवत्ता वाले सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। कैमरों की रिकॉर्डिंग कम से कम 180 दिन तक सुरक्षित रखी जाएगी और उनकी नियमित जांच भी होगी।


नकदी और आभूषण के लिए सख्त नियम


निर्देशों के अनुसार, दान की गिनती के बाद नकदी को एक कार्य दिवस के भीतर अधिकृत बैंक खाते में जमा करना होगा। मंदिर परिसर में बड़ी नकदी रखने से बचने के लिए कहा गया है। सरकार ने एक ही अधिकृत बैंक खाते के उपयोग पर जोर दिया है। नकद दान, सोना, चांदी, आभूषण, विदेशी मुद्रा और अन्य मूल्यवान वस्तुओं के लिए अलग-अलग रजिस्टर बनाए जाएंगे और जहां संभव हो, डिजिटल लेखा प्रणाली अपनाई जाएगी। सभी मूल्यवान वस्तुओं की सूची नियमित रूप से अद्यतन की जाएगी। हर तीन महीने में भौतिक सत्यापन और हर वर्ष सरकार द्वारा नामित समिति से वार्षिक सत्यापन कराया जाएगा। मंदिर अधिकारी हर महीने आंतरिक जांच करेंगे और जिला प्रशासन या विभाग औचक निरीक्षण भी कर सकेगा। नकदी संभालने वाले कर्मचारियों का समय-समय पर बदलाव किया जाएगा। उनका और ठेका एजेंसियों के कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन अनिवार्य होगा। गिनती कक्ष में मोबाइल फोन, बैग या निजी सामान ले जाने की अनुमति नहीं होगी। स्ट्रांग रूम में डबल लॉक व्यवस्था, दो अधिकृत अधिकारियों की मौजूदगी, अलार्म प्रणाली और अग्नि सुरक्षा उपकरण भी अनिवार्य होंगे।


डिजिटल दान को बढ़ावा देने के लिए कदम


सरकार ने श्रद्धालुओं को यूपीआई, क्यूआर कोड, पीओएस मशीन और ऑनलाइन बैंकिंग के माध्यम से दान देने के लिए प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए हैं। सभी डिजिटल दान सीधे मंदिर के अधिकृत बैंक खाते में जमा होंगे। वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट मंदिर प्रबंधन समिति के समक्ष रखी जाएगी और जहां वेबसाइट उपलब्ध होगी, वहां तथा सूचना बोर्ड पर दान के उपयोग की जानकारी प्रदर्शित की जाएगी। चोरी, धोखाधड़ी, छेड़छाड़, कमी या किसी भी अनियमितता की सूचना तुरंत स्थानीय पुलिस, उपायुक्त, कार्यपालक मजिस्ट्रेट, भाषा, कला एवं संस्कृति विभाग और राज्य सरकार को देनी होगी। सूचना छिपाने या देर से देने पर जिम्मेदारी तय की जाएगी। कार्यकारी अधिकारी और मंदिर प्रबंधन समितियों को इन निर्देशों के पालन के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार बनाया गया है। नियमों की अनदेखी होने पर विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सभी सरकारी स्वामित्व वाले और सरकार द्वारा प्रबंधित मंदिरों को 30 दिन के भीतर अनुपालन रिपोर्ट देनी होगी। इसमें सुरक्षा व्यवस्था, सीसीटीवी कवरेज, ऑडिट, मूल्यवान वस्तुओं की सूची, बैंकिंग व्यवस्था, कमियां और उन्हें दूर करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी देनी होगी। भाषा, कला एवं संस्कृति विभाग के निदेशक को राज्य स्तर पर नोडल अधिकारी बनाया गया है। ये निर्देश अगले आदेश तक लागू रहेंगे और जिला मजिस्ट्रेट स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अतिरिक्त दिशा-निर्देश जारी कर सकेंगे।