हिमाचल प्रदेश में ड्रैगन फ्रूट की खेती का बढ़ता चलन
ड्रैगन फ्रूट की खेती में नवाचार
हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में ड्रैगन फ्रूट की खेती तेजी से लोकप्रियता हासिल कर रही है। यहां के किसान न केवल प्राकृतिक खेती के तरीकों को अपनाने में आगे हैं, बल्कि फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने के लिए 'वैल्यू एडिशन' पर भी ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
किसानों की सफलता की कहानी
सेवानिवृत्त प्रवक्ता जीवन सिंह राणा और उनके बेटे आशीष सिंह राणा ने ड्रैगन फ्रूट की खेती की शुरुआत की थी, जिसमें उन्होंने लगभग 500 पौधे लगाए थे। अब, उनकी खेती का दायरा बढ़कर लगभग 5,000 पौधों तक पहुँच गया है।
आशीष सिंह राणा को डॉ. वाई.एस. परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौनी के 41वें स्थापना दिवस पर ड्रैगन फ्रूट की सफल प्राकृतिक खेती के लिए 'उत्कृष्ट किसान सम्मान' से नवाजा गया।
नवीनतम पहल और सरकारी सहायता
कांगड़ा के बागवानी विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. कमल शील नेगी के मार्गदर्शन में इस परिवार ने 2023 में जिले की पहली पंजीकृत ड्रैगन फ्रूट नर्सरी स्थापित की।
डॉ. नेगी ने बताया कि ऊना जिले के अलावा अन्य विकासखंडों के कई किसानों ने भी ड्रैगन फ्रूट की बागवानी की है। किसान 'मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर' के तहत उच्च मूल्य वाली फसलों के लिए 50 प्रतिशत सब्सिडी का लाभ उठा सकते हैं।
फलों के प्रसंस्करण की सुविधा
बागवानी विभाग छोटे आकार के, अतिरिक्त और बिना बिके फलों के प्रसंस्करण को भी बढ़ावा दे रहा है। नगरोटा बगवां स्थित फ्रूट कैनिंग यूनिट के विशेषज्ञ डॉ. सुरेश कुमार नेगी ने बताया कि किसान सामुदायिक कैनिंग सुविधाओं का लाभ उठा सकते हैं।
नगरोटा बगवां में जीवन सिंह राणा द्वारा प्राकृतिक रूप से उगाए गए ड्रैगन फ्रूट का उपयोग करके 'ड्रैगन फ्रूट जैम' तैयार किया गया, जिसमें लगभग 23 किलोग्राम जैम बनाया गया।
किसानों के लिए अपील
इस पहल का मुख्य उद्देश्य फलों की बर्बादी को रोकना, किसानों की आय में वृद्धि करना और उच्च मूल्य वाली फसलों में 'वैल्यू एडिशन' को बढ़ावा देना है। बागवानी विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे अपनी अतिरिक्त उपज को प्रसंस्कृत उत्पादों में बदलने के लिए उपलब्ध सुविधाओं का अधिकतम लाभ उठाएं।
