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हिमाचल प्रदेश में रैबीज के मामलों के बढ़ने पर स्वास्थ्य विभाग की एहतियात

हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले में रैबीज के मामलों में वृद्धि के कारण स्वास्थ्य विभाग ने एहतियाती कदम उठाए हैं। एक व्यक्ति की रैबीज से मृत्यु के बाद, अधिकारियों ने स्थानीय निवासियों को जागरूक करने और आवश्यक स्वास्थ्य उपायों को लागू करने का निर्णय लिया। सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर एंटी-रैबीज टीकों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। जानें इस मामले में क्या कदम उठाए गए हैं और आप कैसे सुरक्षित रह सकते हैं।
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रैबीज के कारण स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता

हमीरपुर: हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले में नादौन राजस्व उपमंडल के कुछ क्षेत्रों में रैबीज के मामलों के बढ़ने के चलते स्वास्थ्य अधिकारियों ने एहतियाती कदम उठाए हैं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अजय अत्री ने बताया कि भालून गांव में एक व्यक्ति की टांडा स्थित डॉ. राजेंद्र प्रसाद सरकारी मेडिकल कॉलेज में रैबीज के कारण मृत्यु की सूचना मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने तुरंत कार्रवाई की।


डॉ. अत्री ने कहा कि मृतक के परिवार से संपर्क कर मामले की विस्तृत जानकारी जुटाई गई और उन्हें चिकित्सकीय सलाह दी गई। इस दौरान स्थानीय निवासियों को रैबीज के कारणों, लक्षणों और बचाव के उपायों के बारे में जागरूक किया गया। सेरा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी ने गांव का दौरा भी किया।


मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि भालून गांव में सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रोटोकॉल के अनुसार आवश्यक कदम उठाए गए हैं और सक्रिय निगरानी सुनिश्चित की गई है। सभी आशा कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्य विभाग के फील्ड स्टाफ को निर्देश दिए गए हैं कि वे कुत्तों या अन्य जानवरों के काटने की घटनाओं की तुरंत रिपोर्ट करें और पीड़ितों को एंटी-रैबीज टीकाकरण के लिए भेजें। जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर एंटी-रैबीज टीकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है।


पशुपालन विभाग के अधिकारियों से संदिग्ध जानवरों की जांच करने का अनुरोध किया गया है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने सभी निवासियों से अपील की है कि यदि उन्हें कोई कुत्ता या अन्य जानवर काट ले, तो वे तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जाकर इलाज कराएं और रैबीज रोधी टीका लगवाएं।