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हिमाचल प्रदेश में शिक्षक को अनिवार्य सेवानिवृत्ति, शराब पीकर स्कूल पहुंचने के आरोप

हिमाचल प्रदेश के शिक्षा विभाग ने एक शिक्षक को शराब पीकर स्कूल पहुंचने और छात्रों के साथ दुर्व्यवहार के आरोप में अनिवार्य सेवानिवृत्ति का आदेश दिया है। विभागीय जांच में आरोप सिद्ध होने के बाद यह कार्रवाई की गई। शिक्षक ने आरोपों का खंडन करते हुए अपनी सेवाओं की ईमानदारी का दावा किया है। शिक्षा विभाग ने अनुशासन और आदर्श आचरण की अपेक्षा की है।
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शिक्षक की अनुशासनात्मक कार्रवाई


हिमाचल प्रदेश के शिक्षा विभाग ने एक शिक्षक, मोहिंदर सिंह, के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की है। उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति का आदेश दिया गया है। यह निर्णय विभागीय जांच के दौरान गंभीर आरोपों के सिद्ध होने के बाद लिया गया। शिक्षा निदेशालय ने केंद्रीय सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1965 के तहत जांच शुरू की थी।


शराब के नशे में स्कूल पहुंचने के आरोप

मोहिंदर सिंह, जो पहले चंबा जिले के राजकीय माध्यमिक विद्यालय रांभो में टीजीटी (नॉन मेडिकल) के पद पर कार्यरत थे, वर्तमान में राजकीय उच्च विद्यालय कंड, जिला कांगड़ा में तैनात थे। उन पर आरोप था कि वह कई बार शराब के नशे में स्कूल पहुंचे, बिना अनुमति अनुपस्थित रहे और छात्रों के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए मारपीट भी की।


शिक्षक ने आरोपों का किया खंडन

जांच के दौरान, मोहिंदर सिंह ने सभी आरोपों से इनकार किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने कठिन क्षेत्रों में ईमानदारी से सेवाएं दी हैं और यह भी दावा किया कि वह पैंक्रियाटाइटिस और मानसिक बीमारी से पीड़ित हैं। उन्होंने प्रारंभिक जांच पर सवाल उठाते हुए वीडियो साक्ष्य को छेड़छाड़ किया हुआ बताया।


अनिवार्य सेवानिवृत्ति के लाभ

शिक्षा विभाग ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि सरकारी शिक्षकों से अनुशासन, ईमानदारी और विद्यार्थियों के प्रति आदर्श आचरण की अपेक्षा की जाती है। छात्रों के साथ दुर्व्यवहार और नशे की हालत में विद्यालय पहुंचना गंभीर कदाचार है। सभी तथ्यों और सेवा अवधि पर विचार करने के बाद, विभाग ने 31 जुलाई 2026 से अनिवार्य सेवानिवृत्ति का निर्णय लिया। साथ ही, शिक्षक के पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभ प्रचलित नियमों के अनुसार दिए जाएंगे।