हिमाचल हाईकोर्ट का कड़ा आदेश: कुल्लू के तीन अधिकारियों का तबादला
कुल्लू में रेव पार्टियों पर हाईकोर्ट की सख्ती
शिमला/ऊषा शर्मा- हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने कुल्लू जिले के कसोल क्षेत्र में रेव पार्टियों के मामले में सख्त कदम उठाते हुए कुल्लू के उपायुक्त (डीसी), पुलिस अधीक्षक (एसपी) और संबंधित एसडीएम को एक सप्ताह के भीतर स्थानांतरित करने का आदेश दिया है। अदालत ने राज्य सरकार को आवश्यक एफआईआर दर्ज करने, विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन करने और इन तीनों अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने के निर्देश भी दिए हैं। अदालत ने कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड से यह स्पष्ट है कि प्रशासन और पुलिस ने अपने कर्तव्यों का सही तरीके से पालन नहीं किया और बड़े पैमाने पर आयोजित कार्यक्रम को रोकने के लिए समय पर प्रभावी कदम नहीं उठाए। मुख्य न्यायाधीश जी.एस. संधावालिया और न्यायमूर्ति बिपिन सी. नेगी की खंडपीठ ने कहा कि मामले की जांच डीआईजी रैंक से कम स्तर के अधिकारी द्वारा नहीं की जानी चाहिए। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि कुल्लू में आईपीएस कैडर के पुलिस अधीक्षक की तैनाती की जाए और उन्हें एसआईटी का हिस्सा बनाया जाए।
अदालत ने कहा कि यह कदम प्रशासनिक व्यवस्था में जनता का विश्वास बहाल करने के लिए आवश्यक है। यह मामला जुलाई 2025 में शुरू हुआ था, जब हाईकोर्ट ने कुल्लू और मंडी जिलों में कथित रेव पार्टियों के संबंध में स्वत: संज्ञान लिया था। अदालत के समक्ष यह आरोप लगाया गया था कि कसोल, जीभी, मनाली और अन्य पर्यटन स्थलों पर रेव पार्टियों का आयोजन किया जा रहा है, जहां बड़ी रकम लेकर लोगों को प्रवेश दिया जाता है और नशीले पदार्थों के उपयोग की शिकायतें भी सामने आई हैं। अदालत ने राज्य सरकार से ऐसे मामलों में दर्ज एफआईआर, गिरफ्तारियों, आयोजकों की पहचान, आय के स्रोत और उनकी संपत्तियों के खिलाफ कार्रवाई संबंधी जानकारी मांगी थी।
जून 2026 में अवकाशकालीन पीठ के समक्ष समाचार रिपोर्टें आईं, जिनमें बताया गया कि कसोल के निकट ग्रेहान क्षेत्र में ग्रीन फॉरेस्ट-1 और ग्रीन फॉरेस्ट-2 में 7 से 11 जून तक बड़े कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे थे। रिपोर्टों के अनुसार, प्रतिभागियों से 10 हजार से 16 हजार रुपये तक लिए जा रहे थे और देश के विभिन्न शहरों के अलावा विदेशों से भी लोग वहां पहुंच रहे थे। इसके बाद अदालत ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) के सचिव, कुल्लू के उपायुक्त और पुलिस अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी। डीएलएसए सचिव की निरीक्षण रिपोर्ट में बताया गया कि आयोजन यशपाल और ईश्वर सिंह नामक व्यक्तियों द्वारा किया जा रहा था। उन्हें 6 जून को ध्वनि विस्तारक यंत्रों के उपयोग की अनुमति दी गई थी।
हालांकि, एक दिन पहले डीएसपी मुख्यालय कुल्लू ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा था कि आयोजन स्थल जंगल से घिरा हुआ है, वहां हजारों लोगों के जुटने की संभावना है और मादक पदार्थों के सेवन तथा अन्य गैरकानूनी गतिविधियों की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि सीमित पुलिस बल के कारण प्रत्येक व्यक्ति पर प्रभावी निगरानी रखना संभव नहीं होगा। इसके बावजूद अनुमति प्रदान कर दी गई। निरीक्षण के दौरान आयोजन स्थल पर बड़े मंच, तेज ध्वनि वाले संगीत उपकरण, करीब 50 कैंपिंग टेंट और हजारों लोगों के ठहरने की व्यवस्था पाई गई। रिपोर्ट के अनुसार, वहां बड़ी मात्रा में खाली शराब की बोतलें, सिगरेट के अवशेष, रोलिंग पेपर और अन्य आपत्तिजनक सामग्री मिली। निरीक्षण टीम ने वहां लगे सीसीटीवी कैमरों की डीवीआर भी सुरक्षित कर पुलिस को सौंप दी। रिपोर्ट में कहा गया कि आयोजन स्थल पर 4 हज़ार से 5 हज़ार लोगों के एकत्र होने की क्षमता थी और वहां अस्थायी शौचालय भी लगाए गए थे।
रिपोर्ट के अनुसार, कार्यक्रम के दौरान दो पर्यटक कोकीन और एलएसडी के साथ पकड़े गए, जिनके खिलाफ एफआईआर वर्ष 2026 दर्ज की गई। इसके अलावा, रूस की नागरिक और कार्यक्रम में डीजे के रूप में शामिल डारिया कुजमिनिख की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। रिपोर्ट में आशंका जताई गई कि मौत ड्रग ओवरडोज से हो सकती है, हालांकि अंतिम कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर तय होगा।
कुल्लू के उपायुक्त ने अदालत में दायर हलफनामे में कहा कि प्रशासन ने किसी रेव पार्टी की अनुमति नहीं दी थी और केवल ध्वनि संबंधी अनुमति दी गई थी। उन्होंने यह भी कहा कि पर्यटन जिले की अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार है और प्रशासन मादक पदार्थों से जुड़े मामलों को रोकने के लिए लगातार कार्रवाई कर रहा है। वहीं पुलिस अधीक्षक ने कहा कि आयोजकों ने संगीत कार्यक्रम और कैंपिंग गतिविधियों के लिए अनुमति मांगी थी तथा सूचना मिलने के बाद पुलिस ने कार्रवाई की।
हालांकि, हाईकोर्ट ने इन दलीलों से संतुष्ट होने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि यदि 9 जून को अवकाशकालीन पीठ हस्तक्षेप नहीं करती तो कार्यक्रम 11 जून तक चलता रहता। अदालत के अनुसार रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की प्रतिकूल रिपोर्ट के बावजूद अनुमति दी गई और बाद में की गई कार्रवाई अदालत के हस्तक्षेप के बाद ही शुरू हुई। अदालत ने कहा कि यह जांच का विषय है कि आयोजकों को प्रशासनिक स्तर पर किसी प्रकार की मौन सहमति या संरक्षण मिला था या नहीं।
अदालत ने कहा कि ऐसे आयोजन केवल कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती नहीं हैं बल्कि स्थानीय वातावरण और क्षेत्र के निवासियों पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं। इसी कारण राज्य सरकार को एक सप्ताह के भीतर तीनों अधिकारियों का तबादला करने, आवश्यक एफआईआर दर्ज करने, एसआईटी गठित करने और विभागीय कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई 6 अगस्त 2026 को होगी, जब राज्य सरकार को अदालत के आदेशों के अनुपालन की जानकारी देनी होगी।
