2027 में iPhone की कीमतों में वृद्धि की संभावना, मेमोरी चिप्स का बढ़ता दबाव
नई दिल्ली में स्मार्टफोन की कीमतों पर चिंता
नई दिल्ली: यदि आप सोच रहे हैं कि इस वर्ष नया फ्लैगशिप स्मार्टफोन खरीदना महंगा साबित हुआ है, तो अगले वर्ष की स्थिति और भी चिंताजनक हो सकती है। टेक्नोलॉजी की दिग्गज कंपनी ऐपल के आईफोन की कीमतों पर एक बार फिर से बड़ा दबाव बढ़ने की संभावना है। यह दिलचस्प है कि इस संभावित मूल्य वृद्धि का कारण कोई नया कैमरा या डिस्प्ले नहीं, बल्कि फोन के अंदर की मेमोरी चिप है, जिसे आप देख नहीं सकते।
सैमसंग की कीमतों में वृद्धि से ऐपल पर असर
हालिया सप्लाई चेन रिपोर्टों के अनुसार, ऐपल ने 2027 की पहली तिमाही से सैमसंग से मिलने वाली मेमोरी चिप्स के लिए बढ़ी हुई दरें स्वीकार कर ली हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि LPDDR5X रैम के लिए लगभग 2 डॉलर प्रति गीगाबिट (Gb) और NAND स्टोरेज के लिए लगभग 0.33 डॉलर प्रति Gb की दर पर सहमति बनी है। यह मौजूदा कीमतों की तुलना में 30 से 40 प्रतिशत की वृद्धि है। ऐपल ने मेमोरी सप्लाई में किसी भी रुकावट से बचने के लिए इन ऊंची दरों पर सहमति दी है।
AI डेटा सेंटर्स की बढ़ती मांग
मेमोरी की कीमतों में इस वृद्धि का मुख्य कारण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का तेजी से बढ़ता विस्तार है। दुनिया भर में एआई डेटा सेंटर्स का निर्माण तेजी से हो रहा है, जहां हाई-बैंडविड्थ मेमोरी (HBM) और हाई-स्पीड स्टोरेज की भारी मांग है। प्रमुख चिप निर्माता कंपनियां जैसे सैमसंग, एसके हाइनिक्स और माइक्रोन अपनी उत्पादन क्षमता का एक बड़ा हिस्सा एआई से जुड़े प्रीमियम मेमोरी उत्पादों पर केंद्रित कर रही हैं। इसके परिणामस्वरूप स्मार्टफोन्स में सामान्य रैम और स्टोरेज चिप्स की आपूर्ति में कमी आई है, जिससे प्रीमियम स्मार्टफोन की कुल लागत में मेमोरी का हिस्सा 30 प्रतिशत से अधिक हो गया है।
क्या 2027 में iPhone की कीमतें बढ़ेंगी?
ऐपल द्वारा मेमोरी की बढ़ी हुई लागत स्वीकार करने का मतलब यह नहीं है कि कंपनी तुरंत इस बढ़ोतरी का बोझ ग्राहकों पर डाल देगी। ऐपल के पास इस अतिरिक्त लागत को संभालने के लिए कई रणनीतिक विकल्प हैं। कंपनी बढ़े हुए खर्च का कुछ हिस्सा अपने मुनाफे में समायोजित कर सकती है, बेस मॉडल के मेमोरी कॉन्फ़िगरेशन में बदलाव कर सकती है, या कीमतों में आंशिक वृद्धि कर सकती है। हालांकि, यदि चिप संकट लंबे समय तक बना रहता है, तो नए मॉडल्स की खुदरा कीमतों पर इसका प्रभाव पड़ना तय है।
एंड्रॉइड यूजर्स पर भी खतरा
यह संकट केवल ऐपल तक सीमित नहीं है। सैमसंग, शाओमी, वीवो, ओप्पो और वनप्लस जैसी कंपनियां भी इन्हीं चिप निर्माताओं से DRAM और NAND चिप्स खरीदती हैं। यदि वैश्विक स्तर पर मेमोरी महंगी होती है, तो एंड्रॉइड स्मार्टफोन्स की कीमतों पर भी इसका प्रभाव पड़ेगा। हालांकि कुछ चीनी ब्रांड्स ने सैमसंग की नई दरों पर आपत्ति जताई है, लेकिन एआई फीचर्स के चलते लगातार बढ़ती रैम की मांग के बीच 2027 में हर स्मार्टफोन खरीदार को महंगाई के नए झटके के लिए तैयार रहना पड़ सकता है।
