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87 वर्षीय इंदरजीत सिंह सिद्धू को मिलेगा पद्मश्री सम्मान

87 वर्षीय इंदरजीत सिंह सिद्धू, एक पूर्व IPS अधिकारी, ने स्वच्छता को अपने जीवन का मिशन बना लिया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा उन्हें पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। सिद्धू ने अपने जीवन में कई महत्वपूर्ण कार्य किए हैं, जिसमें समाज सेवा और स्वच्छता अभियान शामिल हैं। जानें उनके प्रेरणादायक सफर के बारे में और कैसे उन्होंने अपने समर्पण से समाज में बदलाव लाने का प्रयास किया है।
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87 वर्षीय इंदरजीत सिंह सिद्धू को मिलेगा पद्मश्री सम्मान

एक प्रेरणादायक सफर


चंडीगढ़ की गलियों में छड़ी के सहारे कचरा उठाते एक बुजुर्ग को देखकर शायद ही कोई यह सोच सके कि वह कभी पुलिस विभाग के उच्च पद पर कार्यरत रह चुके थे। 87 वर्षीय पूर्व IPS अधिकारी इंदरजीत सिंह सिद्धू ने स्वच्छता को अपने जीवन का मुख्य उद्देश्य बना लिया है। उनकी उम्र और चोटें भी उनके जज़्बे को कम नहीं कर पाईं। यही समर्पण उन्हें अब देश के प्रतिष्ठित पद्मश्री सम्मान तक ले जा रहा है।


पद्मश्री पुरस्कार का समारोह

23 जून को राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक विशेष समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा उन्हें पद्मश्री पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। यह सम्मान न केवल सिद्धू के सामाजिक कार्यों की सराहना है, बल्कि चंडीगढ़ के लिए भी गर्व का विषय है।


स्वच्छता अभियान का समर्पण

इंदरजीत सिंह सिद्धू ने पिछले कई वर्षों से अपने आस-पास के क्षेत्रों को स्वच्छ रखने के लिए निरंतर प्रयास किए हैं। हाल ही में एक सड़क दुर्घटना में उनके पैर में चोट आई थी, लेकिन उन्होंने अपने अभियान को जारी रखा। वे प्रतिदिन सुबह सैर के दौरान पार्कों, सड़कों और सार्वजनिक स्थानों से कचरा उठाकर डस्टबिन में डालते हैं।


खिलाड़ी से पुलिस अधिकारी बनने की यात्रा

6 जून 1938 को पंजाब के गागरपुर गांव में जन्मे सिद्धू ने अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद सार्वजनिक सेवा को अपना लक्ष्य बनाया। छात्र जीवन में वे एक प्रतिभाशाली खिलाड़ी रहे और मुक्केबाजी में कई उपलब्धियां हासिल कीं।


पुलिस सेवा में महत्वपूर्ण योगदान

1963 में उन्होंने पंजाब पुलिस में इंस्पेक्टर के रूप में अपने करियर की शुरुआत की। बाद में उन्हें भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में पदोन्नति मिली। अपने लंबे कार्यकाल में उन्होंने पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली और कोलकाता जैसे विभिन्न क्षेत्रों में सेवाएं दीं। 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान भी उन्होंने महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।


सेवा और समर्पण का राष्ट्रीय सम्मान

उत्कृष्ट पुलिस सेवा के लिए उन्हें पहले भी कई पुरस्कार मिल चुके हैं। 1991 में उन्हें सराहनीय सेवा पुलिस पदक से सम्मानित किया गया। 1996 में DIG पद से रिटायर होने के बाद भी उन्होंने समाज सेवा का मार्ग चुना। अब पद्मश्री सम्मान उनके वर्षों के समर्पण और सामाजिक योगदान की राष्ट्रीय पहचान है।