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88 वर्षीय इंदरजीत सिंह सिद्धू: झाड़ू योद्धा की प्रेरणादायक कहानी

88 वर्षीय इंदरजीत सिंह सिद्धू, जिन्हें 'झाड़ू योद्धा' के नाम से जाना जाता है, ने रिटायरमेंट के बाद भी समाज के लिए सफाई का कार्य जारी रखा है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु उन्हें पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित करेंगी। उनका सफाई अभियान अब एक बड़े आंदोलन में बदल चुका है, जिसमें उनके परिवार और सोसाइटी के लोग भी शामिल हैं। उनकी कहानी यह दर्शाती है कि सेवा की कोई उम्र नहीं होती और स्वच्छता का सपना हर नागरिक का है।
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88 वर्षीय इंदरजीत सिंह सिद्धू: झाड़ू योद्धा की प्रेरणादायक कहानी

एक प्रेरणादायक सफाई योद्धा


नई दिल्ली: रिटायरमेंट के बाद कई लोग आरामदायक जीवन जीना पसंद करते हैं, लेकिन कुछ ऐसे भी होते हैं जो समाज के लिए निरंतर कार्य करते रहते हैं। इनमें से एक प्रेरणादायक व्यक्ति हैं 88 वर्षीय पूर्व आईपीएस अधिकारी इंदरजीत सिंह सिद्धू, जिन्हें 'झाड़ू योद्धा' के नाम से जाना जाता है। स्वच्छता के प्रति उनके समर्पण को मान्यता देते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 23 जून 2026 को उन्हें पद्मश्री पुरस्कार प्रदान करेंगी।


रिटायरमेंट के बाद भी सफाई का जुनून

इंदरजीत सिंह सिद्धू 1964 बैच के आईपीएस अधिकारी रहे हैं। उन्होंने पंजाब पुलिस में उप महानिरीक्षक (डीआईजी) के पद से 1996 में रिटायरमेंट लिया। रिटायरमेंट के बाद उन्होंने चंडीगढ़ के सेक्टर-49 में अपनी सोसाइटी के आस-पास की सड़कों और गलियों की सफाई का कार्य शुरू किया।


सुबह की सफाई की दिनचर्या

हर सुबह 6 बजे, वह झाड़ू, थैला और कभी-कभी रिक्शा लेकर सफाई के लिए निकलते हैं। वह कचरा इकट्ठा करते हैं और उसे सही स्थान पर फेंकते हैं। नगर निगम को कई बार शिकायत करने के बावजूद जब कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो उन्होंने खुद यह जिम्मेदारी ले ली। उनका जीवन का मंत्र है, “सफाई में कोई शर्म नहीं है, स्वच्छता ईश्वर के समान है।”


सफाई अभियान का विस्तार

शुरुआत में जब वह सड़क पर सफाई करते थे, तो लोग उन्हें पागल समझते थे। कुछ लोग हंसते थे, जबकि कुछ ताने मारते थे। लेकिन सिद्धू जी ने कभी हार नहीं मानी। लगभग 30 वर्षों से वह बिना रुके यह कार्य कर रहे हैं। धीरे-धीरे उनका यह व्यक्तिगत प्रयास एक बड़े आंदोलन में बदल गया है। अब उनके परिवार के सदस्य और सोसाइटी के कई लोग भी उनके साथ सफाई में शामिल हो चुके हैं।


आनंद महिंद्रा की सराहना

पिछले वर्ष उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने उनकी प्रशंसा की। उन्होंने कहा, “शिकायत करने के बजाय उन्होंने खुद एक्शन लिया। सेवा की कोई उम्र नहीं होती।” इंदरजीत सिंह सिद्धू यह साबित करते हैं कि अच्छा काम करने के लिए न तो कोई पद चाहिए और न ही कोई उम्र। उन्होंने दिखाया कि स्वच्छ भारत का सपना केवल सरकार का नहीं, बल्कि हर नागरिक का भी है।


एक मिशन के रूप में सफाई

88 वर्ष की आयु में भी रोजाना सुबह उठकर झाड़ू उठाना आसान नहीं है, लेकिन उन्होंने इसे अपना मिशन बना लिया है। उनकी यह मेहनत युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा है। आज पूरा देश उनके साहस और समर्पण को सलाम कर रहा है। पद्मश्री सम्मान प्राप्त करने के बाद, वह और भी अधिक लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने की उम्मीद रखते हैं। उनकी कहानी यह दर्शाती है कि असली सेवा चुपचाप और निरंतर की जाती है।