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8वें वेतन आयोग की मांगें: कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की उम्मीदें

केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की नजरें 8वें वेतन आयोग की मांगों पर हैं। पुरानी पेंशन, चिकित्सा सुविधाएं, और बच्चों की शिक्षा जैसे मुद्दे फिर से उठाए गए हैं। लगभग 45 लाख कर्मचारियों और 68 लाख पेंशनभोगियों पर इन मांगों का प्रभाव पड़ सकता है। सरकार ने आयोग की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया है, और विभिन्न संगठनों से संवाद कर रही है। क्या ये मांगें स्वीकार होंगी? जानें पूरी जानकारी इस लेख में।
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8वें वेतन आयोग की चर्चा


8वां वेतन आयोग: केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की निगाहें अब उन मांगों पर टिकी हैं जो आयोग के समक्ष प्रस्तुत की गई हैं। केवल वेतन वृद्धि की बात नहीं है, बल्कि पुरानी पेंशन, चिकित्सा, बच्चों की शिक्षा और जोखिम भरे कार्यों के भत्तों जैसे कई मुद्दे फिर से उठाए गए हैं। इनका प्रभाव लगभग 45 लाख कर्मचारियों और 68 लाख पेंशनभोगियों पर पड़ सकता है।


सरकार ने लगभग छह महीने पहले आयोग की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया था। तब से आयोग विभिन्न शहरों में संगठनों से संवाद कर रहा है। मांगों को सरकार तक पहुँचाने में नेशनल काउंसिल ऑफ जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC JCM) की महत्वपूर्ण भूमिका है, जिसकी अध्यक्षता कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन कर रहे हैं। अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है, लेकिन यदि प्रमुख मांगें स्वीकार की जाती हैं, तो वेतन, भत्तों और रिटायरमेंट लाभ में महत्वपूर्ण परिवर्तन हो सकता है।


वेतन आयोग के समक्ष प्रस्तुत 9 प्रमुख मांगें

1. पुरानी पेंशन की बहाली
2004 के बाद नौकरी में शामिल हुए कर्मचारी वर्तमान में NPS के अंतर्गत हैं। संगठन चाहते हैं कि उनके लिए पुरानी पेंशन योजना (OPS) पुनः लागू की जाए, ताकि रिटायरमेंट के बाद सुनिश्चित पेंशन प्राप्त हो सके।


2. कैशलेस चिकित्सा सुविधा
कर्मचारी और पेंशनभोगी चाहते हैं कि चिकित्सा के लिए पहले अपनी जेब से बड़ी राशि खर्च न करनी पड़े। रिटायरमेंट के बाद बढ़ते चिकित्सा खर्च को देखते हुए यह मांग विशेष रूप से पेंशनभोगियों के लिए महत्वपूर्ण है।


3. बच्चों की शिक्षा पर अधिक सहायता
शिक्षा भत्ता और हॉस्टल सब्सिडी को पोस्ट ग्रेजुएशन तक बढ़ाने का सुझाव दिया गया है, ताकि उच्च शिक्षा का खर्च उठा रहे परिवारों को सहायता मिल सके।


4. ग्रेच्युटी और पारिवारिक पेंशन में सुधार
डेथ कम रिटायरमेंट ग्रेच्युटी, पारिवारिक पेंशन और कम्युटेड पेंशन के लाभ बढ़ाने की मांग की गई है। कटी हुई पेंशन को 12 साल बाद बहाल करने का प्रावधान बेहतर तरीके से लागू करने की भी मांग की गई है।


5. न्यूनतम वेतन का नया फॉर्मूला
परिवार के खर्च का आधार तय करने वाला मापदंड 3 से बढ़ाकर 3.6 यूनिट करने का सुझाव दिया गया है। यह श्रम मंत्रालय की विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट पर आधारित है।


6. प्रमोशन न मिलने पर MACP में बदलाव
संगठनों ने MACP योजना की विसंगतियों को दूर करने और वेतन के कुछ स्तरों को मिलाकर बेहतर ढांचा बनाने की मांग की है।


7. रेलवे कर्मियों के लिए जोखिम भत्ता
रेलवे के कार्य में कठिन परिस्थितियाँ और जोखिम शामिल होते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए रेलवे कर्मचारियों के लिए अलग जोखिम और कठिनाई भत्ते की मांग उठाई गई है।


8. डिफेंस सिविलियन कर्मियों के लिए बीमा और भत्ता
हथियार, बारूद, कैमिकल या विस्फोटक संभालने वाले सिविलियन कर्मचारियों के लिए विशेष जोखिम भत्ता और बीमा कवर की मांग की गई है।


9. आयोग का दायरा बढ़ाने की मांग
ग्रामीण डाक सेवकों, अर्धसैनिक बलों और केंद्रीय स्वायत्त संस्थाओं के कर्मचारियों को भी शामिल करने का सुझाव दिया गया है। संगठनों का कहना है कि 7वें वेतन आयोग में इन्हें स्थान नहीं मिला था।


आगे की प्रक्रिया

इन मांगों का अर्थ यह नहीं है कि सभी को मंजूरी मिल गई है। 7वें वेतन आयोग को लागू करने में सरकार को 2016-17 में 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक का अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ा था। सुझावों की समीक्षा कार्मिक विभाग (DoPT) और वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग द्वारा की जाएगी, और फिर अंतिम प्रस्ताव कैबिनेट के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। आयोग की शर्तें (Terms of Reference) तय करने की प्रक्रिया भी जारी है।