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8वें वेतन आयोग पर रेलवे कर्मचारियों की चिंताएं और मांगें

8वें वेतन आयोग की बैठक में रेलवे कर्मचारियों ने अपनी चिंताओं को उठाया, जिसमें लंबे कार्य घंटे, ओवरटाइम भुगतान में देरी और ट्रैकमैन के कार्य की सीमा शामिल हैं। ऑल इंडिया रेलवेमेंस फेडरेशन ने सुरक्षा और कर्मचारियों की भलाई के लिए इन मुद्दों को गंभीरता से उठाया है। जानें और क्या मांगें की गई हैं और रेलवे बोर्ड ने क्या प्रतिक्रिया दी है।
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8वें वेतन आयोग का महत्व

8वें वेतन आयोग: जब सरकारी कर्मचारियों को 8वें वेतन आयोग का नाम सुनाई देता है, तो उनके मन में सबसे पहले बढ़ी हुई सैलरी और भत्तों का ख्याल आता है। लेकिन रेलवे कर्मचारियों के लिए यह मामला इससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। हाल ही में हुई बैठक में कर्मचारियों से जुड़े कई मुद्दे उठाए गए, जो उनकी दैनिक ड्यूटी से सीधे जुड़े हुए हैं। लंबे कार्य घंटे, ओवरटाइम का भुगतान और कार्य की परिस्थितियों पर कर्मचारी संगठनों ने रेलवे बोर्ड के समक्ष अपनी चिंताएं व्यक्त की।


लोको पायलटों की ड्यूटी पर उठे सवाल

ऑल इंडिया रेलवेमेंस फेडरेशन ने 8वें वेतन आयोग की बैठक में लोको पायलटों की ड्यूटी का मुद्दा उठाया। संगठन का कहना है कि कर्मचारियों को जरूरत के नाम पर 14, 16 और 17 घंटे तक ट्रेन चलवाना उचित नहीं है। जब ड्यूटी की एक निर्धारित सीमा है, तो उसका पालन होना चाहिए। AIRF ने लंबे कार्य घंटों को केवल थकान का विषय नहीं माना, बल्कि इसे ट्रेन संचालन की सुरक्षा से भी जोड़ा है।


TA और ओवरटाइम भुगतान की समय पर मांग

बैठक में ट्रैवल अलाउंस और ओवरटाइम भुगतान में देरी की भी शिकायत की गई। AIRF के अनुसार, रेलवे बोर्ड ने बताया कि लगभग 2.90 लाख करोड़ रुपये के रेलवे बजट का 95 प्रतिशत हिस्सा खर्च हो चुका है। कर्मचारी संगठन ने सवाल उठाया कि जब कर्मचारी अपनी जिम्मेदारियों को निभा रहे हैं, तो उनके वैध TA और OT का भुगतान समय पर क्यों नहीं किया जा रहा है। संगठन का कहना है कि भत्ते और ओवरटाइम कर्मचारी की आय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।


ट्रैकमैन के कार्य की सीमा घटाने की मांग

रेलवे के ट्रैकमैन की कार्य परिस्थितियों को लेकर भी कर्मचारी संगठन ने अपनी मांगें रखी हैं। AIRF चाहता है कि ट्रैकमैन से 12 किलोमीटर से अधिक का काम न लिया जाए। वहीं, पीवी मैनुअल में अधिकतम 20 किलोमीटर की सीमा का प्रावधान है। संगठन का कहना है कि कुछ स्थानों पर कर्मचारियों के संघर्ष के बाद 12 किलोमीटर की व्यवस्था लागू की गई है। अब इसी सीमा को व्यापक रूप से लागू करने की मांग उठाई गई है।


रनिंग स्टाफ की ड्यूटी पर चिंता

रनिंग स्टाफ के कार्य घंटों को लेकर भी बैठक में चिंता व्यक्त की गई। AIRF के अनुसार, रेलवे के एक आदेश में जरूरत पड़ने पर कर्मचारियों से 11 घंटे तक लगातार काम लेने की बात कही गई है, जबकि कुछ परिस्थितियों में यह अवधि 12 घंटे तक हो सकती है। संगठन का दावा है कि कुछ स्थानों पर कर्मचारियों से 17 घंटे तक लगातार ड्यूटी कराई जा रही है। AIRF ने इसे कर्मचारियों और रेल संचालन, दोनों की सुरक्षा से जोड़ा है।