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CJP का 'स्कूल ठीक करो' अभियान: ग्रामीण स्कूलों की स्थिति सुधारने की पहल

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 'स्कूल ठीक करो' नामक एक नागरिक अभियान शुरू किया है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण सरकारी स्कूलों की खराब स्थिति को सुधारना है। इस पहल के तहत, स्थानीय नागरिकों को स्कूलों की सुविधाओं का मूल्यांकन करने और समस्याओं को उठाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। CJP का लक्ष्य अगले दो महीनों में कम से कम 100 स्कूलों को बेहतर सुविधाओं से लैस करना है। अभियान में 'सरपंच चैलेंज' जैसी गतिविधियाँ शामिल हैं, जिसमें अभिभावकों और युवाओं को स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं की स्थिति की जानकारी जुटाने के लिए कहा गया है। CJP का मानना है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के बिना देश का विकास संभव नहीं है।
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दिल्ली में 'स्कूल ठीक करो' अभियान की शुरुआत

दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने ग्रामीण सरकारी स्कूलों की खराब स्थिति को सुधारने के लिए एक व्यापक नागरिक अभियान 'स्कूल ठीक करो' की शुरुआत की है। इस पहल के तहत, ग्रामीण परिवारों, युवाओं और स्थानीय नागरिकों को स्कूलों की सुविधाओं का मूल्यांकन करने और पंचायतों व प्रशासन के समक्ष समस्याएं उठाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। CJP का लक्ष्य अगले दो महीनों में कम से कम 100 स्कूलों को बेहतर सुविधाओं से लैस करना है।


CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने बताया कि संगठन का ध्यान अब केवल समस्याओं को उजागर करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वे जमीनी स्तर पर समाधान के लिए भी काम करेंगे। उन्होंने कहा कि देश की बड़ी जनसंख्या गांवों में निवास करती है और ग्रामीण बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान किए बिना देश का विकास संभव नहीं है। CJP का कहना है कि कई बच्चे प्राथमिक शिक्षा के लिए छह से सात किलोमीटर तक पैदल चलने को मजबूर हैं, जो मानसून में कीचड़, गर्मियों में तेज गर्मी और सर्दियों में ठंड के बीच एक बड़ी चुनौती बन जाती है।




इस अभियान के तहत CJP ने 'सरपंच चैलेंज' की शुरुआत की है, जिसमें अभिभावकों और युवाओं से अपने गांव के सरकारी स्कूलों का निरीक्षण करने और वहां की बुनियादी सुविधाओं की स्थिति की जानकारी जुटाने की अपील की गई है। CJP के अनुसार, नागरिक स्कूलों में चार आवश्यक सुविधाओं की जांच करेंगे: लगातार बिजली, साफ और सुरक्षित पेयजल, स्वच्छ शौचालय और पौष्टिक मिड-डे मील। यदि इन सुविधाओं की कमी पाई जाती है, तो स्थानीय पंचायत और प्रशासन के समक्ष मामला उठाया जाएगा।


अभियान के तहत नागरिकों को स्कूलों में मौजूद कमियों की तस्वीरें और अन्य जानकारी मोबाइल फोन के माध्यम से दर्ज करने के लिए कहा गया है। CJP का दावा है कि इस रिकॉर्ड को संबंधित अधिकारियों के सामने प्रस्तुत कर जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी। संगठन ने ग्रामीण क्षेत्रों में विश्वसनीय स्कूल परिवहन व्यवस्था विकसित करने की भी मांग की है, ताकि बच्चों को लंबी दूरी तक पैदल चलने की मजबूरी से राहत मिल सके।


CJP ने स्कूलों की समस्याओं के समाधान के लिए 30 दिन की स्थानीय निगरानी व्यवस्था का प्रस्ताव रखा है। पहले 15 दिनों में समुदाय स्कूल की कमियों का ऑडिट करेगा और संबंधित अधिकारियों को जानकारी देगा, यह देखने के लिए कि सुधार कार्य शुरू हुआ या नहीं। इसके बाद 16वें से 30वें दिन तक नागरिक मरम्मत और निर्माण कार्य की प्रगति पर नजर रखेंगे। इससे काम की गुणवत्ता और इस्तेमाल होने वाली सामग्री की भी निगरानी की जा सकेगी।

CJP ने अभियान के पहले चरण में कम से कम 100 सरकारी स्कूलों को बेहतर स्थिति में लाने का लक्ष्य रखा है। इन स्कूलों को मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे सफल व्यवस्था को देश के अन्य गांवों के स्कूलों में भी लागू किया जा सके।

CJP ने गुणवत्तापूर्ण सरकारी शिक्षा को राजनीतिक दलों से ऊपर का मुद्दा बताते हुए जनप्रतिनिधियों से ग्रामीण स्कूलों की स्थिति सुधारने में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की है। संगठन ने सरकारी खर्च की प्राथमिकताओं पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि बड़े प्रोजेक्ट्स के साथ ग्रामीण शिक्षा के बुनियादी ढांचे पर पर्याप्त ध्यान दिया जाना चाहिए। CJP ने 'स्मार्ट सिटी' जैसी शहरी योजनाओं के साथ ग्रामीण विकास को भी प्राथमिकता देने की मांग की है।

स्वतंत्रता दिवस से पहले CJP ने सांसदों, विधायकों और अन्य निर्वाचित जनप्रतिनिधियों से ग्रामीण बच्चों के लिए बेहतर स्कूल उपलब्ध कराने की अपील की है। संगठन का कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को शिक्षा से जोड़ना जरूरी है, ताकि वे कम उम्र में काम करने के लिए मजबूर न हों।