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IAS अधिकारी नेहा सिंह का बार-बार तबादला: एक गंभीर मुद्दा

IAS अधिकारी नेहा मारव्या सिंह ने अपने चौथे तबादले पर नाराजगी व्यक्त की है, जिसमें उन्हें केवल 50 दिन काम करने का मौका मिला। उन्होंने अधीनस्थों द्वारा असहयोग और धमकी का आरोप लगाया है। सिंह ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि बार-बार के तबादले उनके कामकाज में बाधा डालते हैं। उन्होंने IAS अधिकारियों के संगठन से अपनी शिकायतों पर ध्यान देने की अपील की है। क्या यह स्थिति अन्य अधिकारियों के लिए भी खतरा बन सकती है? जानें पूरी कहानी।
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नेहा सिंह का तबादला विवाद


मध्य प्रदेश कैडर की 2011 बैच की IAS अधिकारी नेहा मारव्या सिंह ने हाल ही में अपने चौथे तबादले पर नाराजगी व्यक्त की है। उनका कहना है कि उन्हें हाल की पोस्टिंग में केवल 50 दिन ही काम करने का मौका मिला। सिंह ने IAS अधिकारियों के संगठन के माध्यम से अपनी चिंताओं को साझा करते हुए प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं।


एक साल में चौथी बार तबादला

नेहा सिंह, जो 40 वर्ष की हैं, ने 5 सितंबर को जारी तबादला सूची में अपने नाम को देखकर निराशा जताई। उन्होंने मध्य प्रदेश IAS ऑफिसर्स एसोसिएशन को भेजे गए संदेश में कहा कि वह इस घटनाक्रम से अत्यंत परेशान और हतोत्साहित हैं। उनके अनुसार, उनकी सबसे हालिया पोस्टिंग केवल 50 दिन तक चली, और इस तरह के बार-बार तबादले उनके कामकाज में बाधा डालते हैं।


अधीनस्थों पर असहयोग का आरोप

सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ अधीनस्थ कर्मचारियों ने उनके खिलाफ असहयोग का रवैया अपनाया और उन्हें हटाने की धमकी दी। उन्होंने कहा कि उन्होंने अनुशासनहीनता और दुर्व्यवहार के मामलों की जानकारी उचित अधिकारियों को दी थी, लेकिन इसके बजाय उनका तबादला कर दिया गया। सिंह ने सवाल उठाया कि क्या किसी IAS अधिकारी को उसके अधीनस्थ इस तरह से दबाव में डालकर स्थानांतरित करवा सकते हैं।


सरकारी आदेशों का पालन

नेहा सिंह ने स्पष्ट किया कि वह सरकारी सेवा के नियमों और स्थानांतरण के अधिकार को समझती हैं। उनका कहना है कि IAS अधिकारी के रूप में, उन्हें जहां भी जिम्मेदारी दी जाती है, वहां काम करना उनकी ड्यूटी है। हालांकि, बार-बार के तबादलों ने उन्हें मानसिक रूप से निराश किया है। उन्होंने कहा कि जब भी वह किसी नए पद पर काम समझने लगती हैं, उन्हें हटा दिया जाता है।


भविष्य के लिए चिंता

सिंह ने अपने संदेश में कहा कि उन्होंने वर्षों तक चुपचाप परिस्थितियों का सामना किया है। उन्होंने यह भी कहा कि कई बार उन्हें किनारे रखा गया और काम नहीं दिया गया। अब उन्होंने IAS अधिकारियों के संगठन से अपनी शिकायतों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की है। उनका मानना है कि यदि उनके साथ ऐसा हो सकता है, तो भविष्य में कोई और अधिकारी भी निशाना बन सकता है।