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NEET पेपर लीक पर राहुल गांधी का धरना: सरकार से बातचीत का नतीजा शून्य

NEET परीक्षा के पेपर लीक और छात्रों पर लाठीचार्ज के मुद्दे पर राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना दिया। इस दौरान जितेंद्र सिंह ने बातचीत की, लेकिन राहुल गांधी ने सरकार के प्रस्ताव को ठुकरा दिया। धरने के दौरान राहुल ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की भी मांग की। जानें इस राजनीतिक हलचल की पूरी कहानी।
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सियासी बवाल और धरना

नई दिल्ली। NEET परीक्षा के पेपर लीक और छात्रों पर लाठीचार्ज के मुद्दे ने देशभर में राजनीतिक हलचल पैदा कर दी है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे सहित अन्य विपक्षी नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास के बाहर धरने पर बैठ गए हैं। वे शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। इस घटनाक्रम के बीच, प्रधानमंत्री कार्यालय के राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने राहुल गांधी से बातचीत करने का प्रयास किया, लेकिन यह वार्ता बेनतीजा रही। दोनों नेताओं के बीच कई मिनटों तक चर्चा हुई, लेकिन राहुल गांधी ने सरकार के प्रस्ताव को ठुकरा दिया।


जितेंद्र सिंह की प्रतिक्रिया

जितेंद्र सिंह ने सोशल मीडिया पर लिखा कि कुछ समय पहले उन्हें जानकारी मिली कि कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता धरने पर बैठे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने इस स्थिति को देखते हुए उन्हें और केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन को वार्ता के लिए भेजा।


धरने की समाप्ति की शर्तें

राहुल गांधी को अनुरोध किया गया कि वे धरना समाप्त करें, क्योंकि यह स्थान धरने के लिए उपयुक्त नहीं है और इससे आम जनता को परेशानी हो रही है। राहुल गांधी ने कहा कि यदि सरकार संसद में NEET और संबंधित मुद्दों पर चर्चा करने के लिए सहमत होती है, तो वह धरना समाप्त कर देंगे। कुछ समय बाद, सरकार ने आश्वासन दिया कि उनकी मांग को मान लिया गया है।

हालांकि, जब राहुल गांधी को यह सूचना दी गई, तो उन्होंने कहा कि वह केवल चर्चा पर संतुष्ट नहीं होंगे, बल्कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की भी मांग की। जब उन्हें याद दिलाया गया कि उन्होंने पहले केवल चर्चा की मांग की थी, तो उन्होंने कहा कि उनकी मांगें अब बदल गई हैं।


लोकतंत्र के मूल्यों का उल्लंघन

राहुल गांधी का इस तरह से अपनी बात से मुकर जाना दुर्भाग्यपूर्ण है और यह लोकतंत्र के मूल्यों के खिलाफ है। सरकार NEET और संबंधित मुद्दों पर संसद में चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन कांग्रेस ने इस गंभीर विषय पर अब तक औपचारिक चर्चा का कोई नोटिस नहीं दिया है। राहुल गांधी का यह व्यवहार लोकतंत्र के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है।