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NEET प्रदर्शन में पैलेट गन के उपयोग पर CRPF की रिपोर्ट का खुलासा

दिल्ली में NEET परीक्षा के विरोध में हुए प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के उपयोग को लेकर CRPF ने एक आंतरिक समीक्षा रिपोर्ट प्रस्तुत की है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि सुरक्षा बलों ने सभी मानक संचालन प्रक्रियाओं का पालन किया। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि प्रदर्शनकारियों द्वारा सुरक्षाबलों पर हमले किए गए, जिसमें कई जवान घायल हुए। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और सुप्रीम कोर्ट में पेश किए जाने वाले तथ्यों के बारे में।
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CRPF की आंतरिक समीक्षा रिपोर्ट

नई दिल्ली। मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET के खिलाफ दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर CRPF ने अपनी आंतरिक समीक्षा रिपोर्ट प्रस्तुत की है। इस रिपोर्ट में यह बताया गया है कि हिंसक भीड़ को नियंत्रित करने के लिए उठाए गए कदम में सभी मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOPs) और दंगा-रोधी नियमों का पालन किया गया था।


बल प्रयोग की चरणबद्ध प्रक्रिया

CRPF की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान सुरक्षाबलों ने बल प्रयोग के निर्धारित क्रम का पालन किया। सबसे पहले, भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाउडस्पीकर के माध्यम से चेतावनी दी गई। जब स्थिति काबू में नहीं आई, तब आंसू गैस के गोले दागे गए और लाठीचार्ज किया गया। जब ये उपाय विफल हो गए, तब पैलेट गन का उपयोग किया गया।


दिल्ली पुलिस से मिली मंजूरी

रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि दंगा-रोधी इकाई 'Rapid Action Force' ने यह कदम कानून के दायरे में उठाया। पैलेट गन का उपयोग करने से पहले दिल्ली पुलिस के डीसीपी/एसीपी स्तर के अधिकारियों से लिखित अनुमति प्राप्त की गई थी।


सुरक्षाबलों पर हमले के परिणाम

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि प्रदर्शनकारियों में कुछ 'प्रेरित तत्व' थे, जिन्होंने सुरक्षा बलों पर हमले किए। जानकारी के अनुसार, भीड़ ने सुरक्षाकर्मियों पर पत्थरों और लोहे की रेलिंग से हमला किया। इस हिंसक झड़प में RAF के 47 जवान घायल हुए, जिनमें से 6 को गंभीर चोटें आईं। पैलेट गन के छर्रे लगने से तीन से पांच प्रदर्शनकारियों के घायल होने की भी पुष्टि हुई है।


सुप्रीम कोर्ट में पेश किए जाएंगे तथ्य

CRPF के महानिदेशक ने बताया कि यह मामला वर्तमान में माननीय न्यायालय के विचाराधीन है। बल द्वारा इस आंतरिक समीक्षा के सभी निष्कर्षों और तथ्यों को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।