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RERA प्रोजेक्ट्स की डेडलाइन में 4 महीने की बढ़ोतरी: होमबायर्स को मिलेगी राहत

केंद्र सरकार ने रेरा के तहत पंजीकृत रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स की डेडलाइन को 4 महीने बढ़ाने का निर्णय लिया है। यह कदम पश्चिम एशिया में चल रहे संकट और सप्लाई चेन में बाधाओं के कारण उठाया गया है। इससे लाखों होमबायर्स को अपने घरों के पजेशन में और देरी का सामना करना पड़ सकता है। जानें इस फैसले का क्या असर होगा और किन प्रोजेक्ट्स को राहत मिलेगी।
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पश्चिम एशिया संकट और सप्लाई चेन के प्रभाव


RERA प्रोजेक्ट्स की डेडलाइन में बढ़ोतरी, नई दिल्ली: यदि आप अपने नए घर या फ्लैट के पजेशन का इंतजार कर रहे हैं, तो आपको और अधिक समय तक इंतजार करना पड़ सकता है। केंद्र सरकार ने रेरा के तहत पंजीकृत कई रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स के लिए समयसीमा को 4 महीने तक बढ़ाने की सलाह दी है। यह निर्णय उन लाखों होमबायर्स पर सीधा प्रभाव डालेगा, जो अपने घर की चाबी समय पर मिलने की उम्मीद कर रहे थे।


निर्माण क्षेत्र पर प्रभाव

केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने देशभर की रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटीज को एक एडवाइजरी जारी की है, जिसमें कहा गया है कि योग्य प्रोजेक्ट्स को 4 महीने का अतिरिक्त समय दिया जा सकता है। मंत्रालय का कहना है कि पश्चिम एशिया में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव और सप्लाई चेन में बाधाओं ने निर्माण कार्य को प्रभावित किया है।


कच्चे माल की उपलब्धता में कमी

सरकार के अनुसार, पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण वैश्विक सप्लाई चेन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। निर्माण में उपयोग होने वाले कई आवश्यक कच्चे माल और उपकरणों की उपलब्धता में कमी आई है। इसके साथ ही लॉजिस्टिक्स लागत और शिपिंग से जुड़ी समस्याएं भी बढ़ गई हैं।


कौन से प्रोजेक्ट्स को मिलेगा लाभ?

मंत्रालय की एडवाइजरी के अनुसार, उन रजिस्टर्ड रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स को राहत मिलेगी जिनकी मूल कंप्लीशन डेट 28 फरवरी 2026 या उसके बाद है। ऐसे प्रोजेक्ट्स को एक बार में 4 महीने का अतिरिक्त समय दिया जाएगा।


बिल्डरों के लिए आवेदन की प्रक्रिया

आमतौर पर, किसी प्रोजेक्ट की डेडलाइन बढ़ाने के लिए डेवलपर को संबंधित रेरा प्राधिकरण के पास आवेदन करना पड़ता है। लेकिन इस बार केंद्र सरकार ने राज्यों की रेरा अथॉरिटीज को सलाह दी है कि वे एक सामान्य आदेश जारी करें ताकि योग्य प्रोजेक्ट्स को बिना अतिरिक्त कागजी कार्रवाई के राहत मिल सके।


होमबायर्स के लिए निहितार्थ

इस निर्णय से डेवलपर्स को प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा, लेकिन दूसरी ओर, कई खरीदारों को और अधिक इंतजार करना पड़ सकता है। जिन लोगों ने गृहप्रवेश या किराए से छुटकारा पाने की योजनाएं बनाई थीं, उन्हें अब कुछ और महीनों का इंतजार करना पड़ सकता है।


54 लाख घरों की डिलीवरी पर प्रभाव

पश्चिम एशिया संकट का प्रभाव केवल कागजों तक सीमित नहीं है। एक रिपोर्ट में चेतावनी दी गई थी कि इस संकट के कारण देशभर में लगभग 54 लाख घरों की डिलीवरी प्रभावित हो सकती है। यदि संघर्ष लंबा खिंचता है, तो निर्माण लागत में वृद्धि और कच्चे माल की उपलब्धता पर असर पड़ सकता है।