UPI ट्रांजैक्शन पर शुल्क लगाने का नया कानून पारित
UPI उपयोगकर्ताओं के लिए कोई शुल्क नहीं
हाल ही में संसद ने UPI ट्रांजैक्शन पर जीरो मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) की व्यवस्था समाप्त करने का कानून पारित किया है। केंद्रीय वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि अब UPI ट्रांजैक्शन पर शुल्क लगाया जा सकता है, लेकिन यह शुल्क अंतिम उपयोगकर्ताओं पर नहीं, बल्कि व्यापारियों पर लागू होगा। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने आरोप लगाया था कि सरकार आम लोगों से शुल्क वसूलने की योजना बना रही है।
संसद में कानून का पारित होना
गुरुवार को 'टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल, 2026' को संसद में मंजूरी मिली। इस बिल में कई महत्वपूर्ण संशोधन किए गए हैं, जिसमें 'पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007' में बदलाव भी शामिल है। यह बिल उस प्रावधान को समाप्त करता है, जिसके तहत 2020 से UPI और RuPay डेबिट कार्ड ट्रांजैक्शन पर जीरो MDR अनिवार्य था। इस बदलाव के बाद, मुफ्त UPI ट्रांजैक्शन की सुविधा समाप्त होने की संभावना जताई जा रही है।
व्यापारियों पर MDR का प्रभाव
केंद्रीय वित्त मंत्री सीतारमण ने जयराम रमेश के सोशल मीडिया पोस्ट का जवाब देते हुए कहा कि MDR केवल व्यापारियों पर लागू होगा, न कि अंतिम उपयोगकर्ताओं पर। उन्होंने बताया कि इस शुल्क से बैंकों और फिनटेक कंपनियों को अपने इंफ्रास्ट्रक्चर, इनोवेशन और सुरक्षा में अधिक निवेश करने में मदद मिलेगी, जिसका लाभ सभी UPI उपयोगकर्ताओं को मिलेगा।
बैंकों और फिनटेक कंपनियों को लाभ
वित्त मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NCPI) की अध्यक्षता वाली यूपीआई सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी ने अभी तक MDR फ्रेमवर्क पर कोई निर्णय नहीं लिया है। यह निर्णय कराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 के पारित होने के बाद ही लिया जाएगा।
जयराम रमेश के सवाल
यह स्पष्टीकरण तब आया जब जयराम रमेश ने कहा कि यह बिल 'MDR लागू करने का रास्ता बनाता है', जिससे भविष्य में सभी प्रकार के डिजिटल पेमेंट पर शुल्क लगाया जा सकता है। उनका मानना है कि इसका बोझ अंततः आम लोगों पर पड़ेगा, जिन्हें UPI का उपयोग करने के लिए भी शुल्क देना पड़ सकता है।
