अमेरिका में H-1B वीजा धारकों के लिए नया नियम: नौकरी जाने पर तुरंत देश छोड़ना होगा
अमेरिका में विदेशी पेशेवरों पर संकट
वाशिंगटन: अमेरिका में कार्यरत लाखों विदेशी पेशेवरों, विशेषकर भारतीय आईटी विशेषज्ञों, के लिए एक गंभीर स्थिति उत्पन्न हो गई है। अमेरिकी सरकार ने विदेशी कर्मचारियों के लिए 60 दिनों के ग्रेस पीरियड को समाप्त करने का प्रस्ताव रखा है। इस निर्णय से भारतीय कुशल श्रमिकों के भविष्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है, क्योंकि नौकरी जाने के बाद उन्हें नई नौकरी खोजने या अपने कानूनी स्थिति में बदलाव का अवसर नहीं मिलेगा।
नौकरी जाने पर तुरंत देश छोड़ने की आवश्यकता
वर्तमान आव्रजन नियमों के अनुसार, यदि किसी H-1B वीजा धारक की नौकरी समाप्त हो जाती थी, तो उसे देश में रहने के लिए 60 दिनों का वैधानिक ग्रेस पीरियड मिलता था। इस अवधि में कर्मचारी नई नौकरी की तलाश कर सकता था या अपने वीजा स्टेटस में बदलाव के लिए आवेदन कर सकता था। नए प्रस्ताव के लागू होने पर यह छूट समाप्त हो जाएगी, और नौकरी खत्म होते ही कर्मचारी को तुरंत अमेरिका छोड़ना होगा।
कंपनियों को होगी कठिनाई, स्थानीय लोगों को मिलेगा लाभ
अमेरिकी प्रशासन ने इस कठोर प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा है कि इससे कंपनियों को प्रारंभिक रूप से कार्यबल प्रबंधन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन इसका लाभ स्थानीय अमेरिकी नागरिकों को होगा। प्रशासन का मानना है कि विदेशी श्रमिकों पर निर्भरता कम होने से नौकरियां अमेरिकी पेशेवरों को मिल सकेंगी।
भारतीय कर्मचारियों में चिंता का माहौल
अमेरिका में जारी होने वाले कुल H-1B वीजा में से 70 प्रतिशत से अधिक भारतीय पेशेवरों के पास हैं। यदि यह नया नियम लागू होता है, तो छंटनी के दौर में भारतीय इंजीनियरों और उनके परिवारों को गंभीर अनिश्चितता का सामना करना पड़ेगा, जिससे वहां के भारतीय समुदाय में चिंता का माहौल बन गया है।
