अमेरिकी सेना के सर्जन ने नाक के रास्ते मस्तिष्क ट्यूमर को निकाला
नवीनतम शल्य प्रक्रिया से मस्तिष्क ट्यूमर का सफल उपचार
(सागर कुलकर्णी) वाशिंगटन, 31 जुलाई - एक भारतीय मूल के अमेरिकी सेना के सर्जन ने एक मरीज के गोल्फ की गेंद के आकार के मस्तिष्क ट्यूमर को नाक के माध्यम से निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस अभिनव और न्यूनतम चीरा वाली तकनीक के कारण मरीज को खोपड़ी खोलकर की जाने वाली पारंपरिक मस्तिष्क सर्जरी से बचाया गया। यह सर्जरी वाशिंगटन के निकट स्थित 'वॉल्टर रीड नेशनल मिलिट्री मेडिकल सेंटर' में विशेषज्ञ सर्जन मेजर जगतकुमार पटेल और न्यूरोसर्जन लेफ्टिनेंट कर्नल चार्ल्स मिलर द्वारा की गई।
मरीन कोर स्टाफ सार्जेंट एंडी आर्चर पिछले 15 वर्षों से इस ट्यूमर से ग्रस्त थे। अमेरिकी रक्षा विभाग ने बताया कि इस प्रक्रिया को सफलतापूर्वक संपन्न करने के लिए दोनों विशेषज्ञों के बीच अत्यधिक सटीक और समन्वित सहयोग की आवश्यकता थी। यह ट्यूमर आर्चर की पिट्यूटरी ग्रंथि के सामने स्थित था और उनकी दृष्टि तंत्रिका पर दबाव डाल रहा था।
डॉ. पटेल ने मरीज की जटिल नासिका संरचना का अध्ययन कर एक शल्य योजना बनाई, जिससे एंडोस्कोप की मदद से नाक के मार्ग से सुरक्षित तरीके से ट्यूमर को निकाला जा सके। उन्होंने कहा, 'यदि ट्यूमर सही आकार का हो और ऐसी जगह हो जहां इस तकनीक से पहुंचा जा सके, तो खोपड़ी खोलने की आवश्यकता नहीं होती। नाक के रास्ते हमें सबसे बेहतर पहुंच मिलती है और ट्यूमर को पूरी तरह निकालने की संभावना अधिक होती है।'
शल्य मार्ग तैयार करने के बाद, डॉ. पटेल ने एंडोस्कोपिक कैमरे के माध्यम से ऑपरेशन के दौरान ट्यूमर का उच्च गुणवत्ता वाला दृश्य उपलब्ध कराया। इससे लेफ्टिनेंट कर्नल मिलर को सुरक्षित तरीके से ट्यूमर को निकालने में मदद मिली। डॉ. पटेल ने कहा, 'जब उन्हें महत्वपूर्ण संरचनाओं तक पहुंचना होता, तो मैं कैमरे को और पास ले जाता था जिससे उन्हें स्पष्ट दृश्य मिलता।'
चिकित्सकों की टीम ने इस महीने की शुरुआत में ट्यूमर का 99 प्रतिशत से अधिक हिस्सा सफलतापूर्वक निकाल दिया। हालांकि, ट्यूमर का एक सूक्ष्म हिस्सा ऑप्टिक नर्व के पीछे रह गया, जिसे निकालने पर गंभीर जोखिम हो सकता था। रक्षा विभाग के अनुसार, ऐसा करने से मरीज को स्ट्रोक या स्थायी दृष्टि हानि हो सकती थी।
डॉ. पटेल ने कहा, 'ऐसे समय आपको खुद से पूछना पड़ता है कि क्या उस आखिरी मिलीमीटर ट्यूमर को निकालने के लिए मरीज को स्ट्रोक का खतरा देना उचित होगा?' सर्जनों ने विश्वास व्यक्त किया कि बचे हुए ट्यूमर का सूक्ष्म हिस्सा दोबारा बढ़ने की संभावना बहुत कम है। सर्जरी के बाद, चिकित्सकों ने आर्चर के पैर से ऊतक का एक छोटा हिस्सा लेकर खोपड़ी के 'बेस' का पुनर्निर्माण किया।
रक्षा विभाग के अनुसार, ऑपरेशन के केवल दो दिन बाद आर्चर के शरीर पर किसी बड़ी मस्तिष्क सर्जरी के कोई स्पष्ट बाहरी संकेत नहीं थे। उनकी दृष्टि में पहले से सुधार शुरू हो गया था, जबकि ऑपरेशन के बाद उन्हें केवल सामान्य सिरदर्द और उस पैर में हल्का दर्द महसूस हो रहा था, जहां से ऊतक लिया गया था।
