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ईरान-अमेरिका संघर्ष: मिस्र में अमेरिकी गैस टैंकर पर ड्रोन हमला

ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे संघर्ष ने एक नया मोड़ लिया है, जब मिस्र के डामिएत्ता पोर्ट पर एक अमेरिकी गैस टैंकर पर ड्रोन हमला हुआ। इस हमले के पीछे ईरान का हाथ होने की आशंका जताई जा रही है, जिसका उद्देश्य यह संदेश देना था कि यदि युद्ध बढ़ता है, तो वैश्विक समुद्री शिपिंग और ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने चेतावनी दी है कि स्थिति बिगड़ने पर अमेरिका कड़ा जवाब देगा। जानें इस संघर्ष के अन्य पहलुओं और अरब देशों की स्थिति के बारे में।
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अमेरिकी राष्ट्रपति की चेतावनी


वॉशिंगटन डीसी/तेहरान/तेल अवीव: ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा युद्ध अब एक नए और गंभीर चरण में प्रवेश कर चुका है। यह संघर्ष अब फारस की खाड़ी से निकलकर भूमध्य सागर और मिस्र के महत्वपूर्ण ऊर्जा केंद्रों तक फैलता दिखाई दे रहा है। हाल ही में, मिस्र के डामिएत्ता पोर्ट पर एक अमेरिकी गैस टैंकर पर ड्रोन हमले की घटना हुई, जिससे वहां भयंकर विस्फोट हुआ। रिपोर्टों के अनुसार, इस हमले का लक्ष्य अमेरिकी कंपनी के नैचुरल गैस स्टोरेज टैंकर एनरगोस विंटर था, जिसके बाद आग पास के दूसरे टैंकर गैसलॉग सलेम तक फैल गई।


अमेरिका की प्रतिक्रिया

हालांकि, दमकल विभाग ने जल्दी ही आग पर काबू पा लिया और कोई जनहानि नहीं हुई। इस हमले के पीछे ईरान का हाथ होने की आशंका जताई जा रही है। न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, ईरानी सूत्रों ने बताया कि इस हमले का उद्देश्य यह संदेश देना था कि यदि युद्ध बढ़ता है, तो वैश्विक समुद्री शिपिंग और ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने चेतावनी दी है कि यदि स्थिति बिगड़ती है, तो अमेरिका ईरान पर कड़ा हमला करेगा, लेकिन उन्होंने भविष्य में समझौते की संभावना को भी खारिज नहीं किया।


सैन्य गोपनीयता के नियम

अमेरिका को यह चिंता है कि सैनिकों के सोशल मीडिया वीडियो से ईरान यह जानने की कोशिश कर रहा है कि उनके मिसाइल और ड्रोन हमले कितने प्रभावी रहे। इसलिए, एडमिरल ब्रैड कूपर ने सैनिकों को सैन्य गोपनीयता के नियमों का पालन करने की सख्त सलाह दी है। इसके अलावा, मिडिल ईस्ट में तैनात अमेरिकी सैनिकों के मोबाइल फोन भी जल्द जब्त किए जा सकते हैं।


अरब देशों की स्थिति

ईरान-इजराइल संघर्ष के बीच, अरब देश इस टकराव से खुद को दूर रखना चाहते हैं। मिडिल ईस्ट मामलों के विशेषज्ञ जैदोन अलकिनानी ने कहा कि सभी अरब देशों का एक ही उद्देश्य है - किसी भी हालात में सीधे टकराव से बचना।


ईरान के हमले

विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान और इजराइल दोनों ही चाहते हैं कि संघर्ष का दायरा बढ़े और अन्य देश भी इसमें शामिल हों। ईरान पहले ही इराक, कुवैत, कतर और बहरीन जैसे देशों पर हमले कर चुका है। इस बीच, सऊदी अरब ने हाल ही में इराक में ईरान समर्थक लड़ाकों के ठिकानों पर हमले किए हैं।