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उत्तराखंड में चारधाम यात्रा स्थगित, मौसम विभाग का अलर्ट जारी

उत्तराखंड में भारी बारिश के चलते चारधाम यात्रा को 27 सितंबर तक स्थगित कर दिया गया है। मौसम विभाग ने ‘रेड’ और ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया है, जिससे सुरक्षा के मद्देनजर कई जिलों में स्कूल भी बंद कर दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। जानें इस स्थिति के बारे में और अधिक जानकारी।
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चारधाम यात्रा पर मौसम का असर


उत्तराखंड में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण मौसम विभाग ने ‘रेड’ और ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया है। इस स्थिति को देखते हुए चारधाम यात्रा को 27 सितंबर तक के लिए स्थगित कर दिया गया है। इसके साथ ही, सुरक्षा के मद्देनजर पांच जिलों में सभी स्कूल भी बंद कर दिए गए हैं।


राज्य के कई क्षेत्रों में सुबह से ही बारिश हो रही है, और ऊंचाई वाले स्थानों पर बर्फबारी भी हो रही है। हालांकि, अभी तक किसी प्रकार की जनहानि या बड़े नुकसान की सूचना नहीं मिली है।


गढ़वाल आयुक्त आनन्द स्वरूप ने यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए 26 सितंबर की दोपहर से चारधाम यात्रा को स्थगित करने का आदेश दिया है। सभी जिलाधिकारियों को इस संबंध में आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं।


मौसम विभाग ने बागेश्वर, पिथौरागढ़, चंपावत, नैनीताल और ऊधमसिंह नगर के लिए ‘रेड अलर्ट’ जारी किया है। वहीं, देहरादून, पौड़ी, रुद्रप्रयाग, चमोली और अल्मोड़ा के लिए ‘ऑरेंज अलर्ट’ और हरिद्वार, उत्तरकाशी तथा टिहरी के लिए ‘येलो अलर्ट’ जारी किया गया है।


सुरक्षा के लिए बागेश्वर, पिथौरागढ़, चंपावत, नैनीताल और रुद्रप्रयाग में कक्षा 12 तक के सभी स्कूल बंद कर दिए गए हैं।


रविवार के लिए देहरादून, टिहरी, पौड़ी और हरिद्वार के लिए ‘रेड अलर्ट’ जारी किया गया है। उत्तरकाशी, चमोली, नैनीताल और रुद्रप्रयाग के लिए ‘ऑरेंज’, जबकि बागेश्वर, अल्मोड़ा, चंपावत, ऊधमसिंह नगर और पिथौरागढ़ के लिए ‘येलो अलर्ट’ जारी किया गया है।


मौसम विभाग ने कई स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है, जिससे पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन, सड़कें बाधित होने, नदियों में जलस्तर बढ़ने और मैदानी इलाकों में जलभराव का खतरा है।


मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने लोगों और पर्यटकों से सतर्क रहने की अपील की है। उन्होंने ‘रेड अलर्ट’ के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है और नदियों, नालों और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने की चेतावनी दी है।


अधिकारियों को 24 घंटे अलर्ट रहने और नदियों-नालों के जलस्तर, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों, पहाड़ी सड़कों, चारधाम मार्गों और प्रमुख पर्यटन स्थलों की निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं। राहत एवं बचाव के लिए आवश्यक उपकरण और मशीनरी को रणनीतिक स्थानों पर तैयार रखने का भी निर्देश दिया गया है।