उत्तराखंड में हरेला पर्व: 10 लाख पौधों का रोपण और मुख्यमंत्री की शुभकामनाएं
उत्तराखंड का हरेला पर्व
उत्तराखंड: हरेला पर्व, जो कि उत्तराखंड की प्रकृति को समर्पित है, न केवल पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक है, बल्कि इसे मां पार्वती और भगवान शिव के मिलन का भी प्रतीक माना जाता है। आज सुबह, 9 दिन पहले बोए गए हरेले को काटा गया। हरेले के पत्तों को परिवार के सभी सदस्यों के सिर पर शुभकामनाएं देते हुए रखा गया। इस अवसर पर, उत्तराखंड में 10 लाख पौधे लगाने का एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। मुख्यमंत्री धामी ने प्रदेशवासियों को हरेला की बधाई और शुभकामनाएं दी हैं।
हरेला केवल एक लोकपर्व नहीं है, बल्कि यह प्रकृति के प्रति हमारी आस्था और पर्यावरण संरक्षण के प्रति हमारे संकल्प का प्रतीक है। यह पर्व हमें जल, जंगल और जमीन के संरक्षण के लिए प्रेरित करता है, ताकि हम आने वाली पीढ़ियों के लिए एक हरित भविष्य का निर्माण कर सकें।
मैं कामना करता हूं कि यह पावन पर्व आपके जीवन में सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और नई ऊर्जा का संचार करे।
समस्त प्रदेशवासियों को लोकपर्व हरेला की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।
हरेला केवल एक लोकपर्व नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति हमारी आस्था, पर्यावरण संरक्षण के संकल्प और आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित भविष्य के निर्माण का प्रतीक है। यह पर्व हमें जल, जंगल, जमीन के संरक्षण तथा आने वाली… pic.twitter.com/HCujNIh2Dk
— Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) July 16, 2026
मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और प्राकृतिक सौंदर्य की विशिष्ट पहचान है। इसलिए, पर्यावरण संरक्षण की हमारी जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। हमें अपने जल स्रोतों, नदियों और गाड़-गदेरों के संरक्षण के लिए निरंतर प्रयास करना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान से वृक्षारोपण के प्रति जागरूकता बढ़ी है। प्रदेश में हरेला पर्व के अवसर पर वन एवं उद्यान विभाग द्वारा वृक्षारोपण के लिए एक प्रभावी कार्य-योजना बनाई गई है।
उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण अब सामाजिक दायित्व बन गया है। यह प्रयास भावी पीढ़ी को अपनी परंपराओं से जोड़ने और प्रकृति संरक्षण की दिशा में जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के लिए प्रेरित करेगा।
समस्त प्रदेशवासियों को लोकपर्व हरेला की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।
लोकपर्व हरेला प्रकृति के प्रति हमारी आस्था, कृतज्ञता और पर्यावरण संरक्षण के संकल्प का पावन प्रतीक है। यह पर्व हमें आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित, स्वच्छ और समृद्ध भविष्य के निर्माण की प्रेरणा देता है।
आइए, इस… pic.twitter.com/IFEAy8vd46
— Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) July 16, 2026
मुख्यमंत्री ने सभी प्रदेशवासियों से अपील की कि वे अधिक से अधिक वृक्षारोपण करें और पर्यावरण संरक्षण में योगदान दें। उन्होंने सभी सामाजिक संगठनों और संस्थाओं से सक्रिय सहयोग की भी अपील की है।
यह ध्यान देने योग्य है कि हरेला पर्व पर उत्तराखंड में 10 लाख पौधे रोपे जा रहे हैं। देहरादून नगर निगम द्वारा मिशन पोषण संकल्प के अंतर्गत 5 लाख सब्जी के पौधों का वितरण किया जा रहा है। इसके साथ ही, विद्यालयों और आंगनबाड़ियों में सहजन के पौधों का पौधारोपण किया जा रहा है। सार्वजनिक स्थलों पर जनभागीदारी के साथ पौधारोपण अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें 70,000 फलदार और चारा आदि पौधों का वितरण किया जा रहा है.
