कन्या पूजन के लिए 9 कन्याओं की अनुपलब्धता पर क्या करें?
कन्या पूजन का महत्व
नई दिल्ली: शारदीय नवरात्रि के दौरान दुर्गा अष्टमी और नवमी के अवसर पर कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है। शास्त्रों के अनुसार, छोटी कन्याओं को मां दुर्गा का स्वरूप मानकर उनकी पूजा की जाती है। हालांकि, दिल्ली-एनसीआर जैसे बड़े शहरों में श्रद्धालुओं को अक्सर यह समस्या आती है कि वे एक साथ 9 कन्याएं नहीं जुटा पाते। इस स्थिति में भक्तों को यह चिंता होती है कि क्या कम कन्याओं का पूजन करने से उनका व्रत अधूरा रह जाएगा या पूजा का फल नहीं मिलेगा।
कम कन्याओं के पूजन का विकल्प
9 कन्याएं न मिलने पर परेशान होने की जरूरत नहीं
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि किसी कारणवश 9 कन्याएं नहीं मिल रही हैं, तो चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। मां दुर्गा भाव की भूखी हैं। आप अपनी सामर्थ्य के अनुसार 2, 5 या 7 कन्याओं को आमंत्रित करके भी श्रद्धा से पूजन कर सकते हैं। यहां तक कि यदि केवल एक या दो कन्याएं ही मिलती हैं, तो भी विधि-विधान से उनका पूजन करने पर व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है और माता रानी की कृपा बनी रहती है।
लांगुर का महत्व
लांगुर (बटुक भैरव) का विशेष महत्व
कन्या पूजन में कन्याओं के साथ एक छोटे बालक को 'लांगुर' (बटुक भैरव) के रूप में शामिल करना आवश्यक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव के स्वरूप बटुक भैरव की पूजा के बिना मां दुर्गा का पूजन अधूरा माना जाता है। इसलिए, कन्याओं की संख्या चाहे जो भी हो, उनके साथ एक छोटे बालक को लांगुर के रूप में बैठाकर भोजन कराना अत्यंत आवश्यक है।
कन्या पूजन की विधि
घर पर कन्या पूजन की सरल विधि
कन्या पूजन की विधि बेहद सरल और पावन है। सबसे पहले, घर आईं कन्याओं और लांगुर को स्वच्छ आसन पर बिठाएं। फिर, तांबे या कांसे की थाली में उनके चरण धोकर स्वच्छ कपड़े से पोंछें। सभी के माथे पर कुमकुम-अक्षत का तिलक लगाएं और कलाई पर रक्षा सूत्र बांधें। इसके बाद, माता रानी के भोग का पारंपरिक प्रसाद—हलवा, पूरी, काले चने और खीर श्रद्धापूर्वक परोसें। भोजन के बाद कन्याओं के पैर छूकर आशीर्वाद लें और अपनी सामर्थ्य अनुसार दक्षिणा या उपहार देकर विदा करें। यह अनुष्ठान घर में सुख-समृद्धि लाता है।
