कांग्रेस की रामलीला मैदान में प्रस्तावित रैली: राजनीतिक माहौल में हलचल
कांग्रेस की रैली की तैयारी
कांग्रेस पार्टी दिल्ली के रामलीला मैदान में एक महत्वपूर्ण रैली आयोजित करने की योजना बना रही है। पार्टी ने नवंबर के पहले सप्ताह में इस रैली के लिए अनुमति मांगी थी, जिसे दिल्ली पुलिस ने एक नवंबर को आयोजित करने की मंजूरी दे दी है। यह रैली मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के खिलाफ होगी। बताया जा रहा है कि इस रैली में अन्य विपक्षी दल भी शामिल हो सकते हैं। कांग्रेस ने इस आयोजन की तैयारी शुरू कर दी है। शुक्रवार को, पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने विभिन्न समूहों के साथ बैठक की और सभी की जिम्मेदारियों का निर्धारण किया।
राजनीतिक रणनीति और सोशल मीडिया का प्रभाव
कांग्रेस इस रैली के माध्यम से एक बड़ा प्रभाव छोड़ने की कोशिश कर रही है। उनका उद्देश्य यह दिखाना है कि आम आदमी पार्टी और कॉकरोच जनता पार्टी की कोई प्रासंगिकता नहीं है। हालांकि, इस बीच सोशल मीडिया पर राइटविंग इकोसिस्टम द्वारा यह प्रचार किया जा रहा है कि एक नवंबर 1984 को सिखों के खिलाफ दंगे भड़क गए थे। सिख समुदाय उस दिन दंगों का शोक मनाता है, और इस कारण से कांग्रेस पर आरोप लगाया जा रहा है कि वह जानबूझकर उस दिन रैली आयोजित कर रही है। इसके अलावा, विपक्षी दलों का दबाव भी है कि कांग्रेस इस रैली को टाल दे। यह ध्यान देने योग्य है कि इस समय मुख्य चुनाव आयुक्त और एसआईआर के खिलाफ विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं, और सभी पार्टियां आंदोलन कर रही हैं। ऐसे में कांग्रेस ने अनुमति मांगी और दिल्ली पुलिस ने एक नवंबर की तारीख दी, जबकि प्रचार यह हो रहा है कि कांग्रेस सिख विरोधी दंगों के दिन रैली कर रही है। यह स्थिति पंजाब में विधानसभा चुनावों के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण है।
