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गुरचरण दास को मिला लाइफटाइम लिबर्टेरियन अवॉर्ड

प्रसिद्ध लेखक गुरचरण दास को काठमांडू में आयोजित एक समारोह में ‘लाइफटाइम लिबर्टेरियन अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार उनके स्वतंत्रता, उद्यमिता और व्यक्तिगत जिम्मेदारी के प्रति योगदान के लिए दिया गया। दास ने इस अवसर पर आंतरिक स्वतंत्रता की अवधारणा पर भी विचार साझा किए। जानें उनके साहित्यिक सफर और विचारों के बारे में।
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गुरचरण दास को सम्मानित किया गया

काठमांडू, आठ अगस्त: प्रसिद्ध लेखक गुरचरण दास को ‘स्वतंत्रता के विकास में दीर्घकालिक योगदान’ के लिए प्रतिष्ठित ‘लाइफटाइम लिबर्टेरियन अवॉर्ड’ से शनिवार को सम्मानित किया गया। वह इस पुरस्कार को प्राप्त करने वाले पहले भारतीय लेखक बने हैं। यह सम्मान स्वतंत्रता समर्थक संगठन लिबर्टी इंटरनेशनल द्वारा नेपाल के काठमांडू में आयोजित 40वें विश्व सम्मेलन के दौरान दिया गया।


दास (82) ने इस सम्मान को पाकर अपनी खुशी व्यक्त की। उन्होंने ‘आंतरिक स्वतंत्रता’ की अवधारणा पर भी चर्चा की, जिसे उन्होंने ‘उदारवाद की पश्चिमी अवधारणा में भारत का अनूठा योगदान’ बताया। उन्होंने कहा, ‘जिंदगी में कितनी बार ऐसा होता है कि आपको उस चीज के लिए सम्मान मिले, जिसे आप पूरी निष्ठा से सही मानते हैं?’ आयोजकों के अनुसार, यह पुरस्कार गुरचरण दास के तीन दशकों से अधिक के लेखकीय सफर का सम्मान है, जिसमें उन्होंने स्वतंत्रता, उद्यमिता और व्यक्तिगत जिम्मेदारी के समर्थन में भारत के आर्थिक और नैतिक विमर्श को दिशा दी है।


बयान में यह भी कहा गया है कि दास के साहित्यिक योगदान की मुख्य कड़ी जीवन के चार पारंपरिक भारतीय लक्ष्यों पर आधारित चार किताबों की श्रृंखला है, जिसे वे ‘आज की दुनिया में इंसानी तरक्की के एक सदाबहार आदर्श’ के रूप में देखते हैं। इन पुस्तकों में ‘इंडिया अनबाउंड’, ‘द डिफिकल्टी ऑफ़ बीइंग गुड’, ‘काम: द रिडल ऑफ डिजायर’ और ‘अनदर सॉर्ट ऑफ फ्रीडम’ शामिल हैं। दास ने पूर्णकालिक लेखन को अपनाने से पहले उपभोक्ता वस्त्र बनाने वाली कंपनी प्रॉक्टर एंड गैंबल इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के रूप में कार्य किया था।