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गुलजार सिंह मौत मामले में हाईकोर्ट ने मांगी स्टेटस रिपोर्ट

पंजाब के संगरूर जिले में गुलजार सिंह की मौत के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से स्थिति रिपोर्ट मांगी है। याचिकाकर्ताओं ने सीबीआई जांच की मांग की है, जबकि मंत्री हरपाल सिंह चीमा का नाम भी मामले में सामने आया है। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और पुलिस जांच की स्थिति के बारे में।
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गुलजार सिंह मौत मामले की सुनवाई


गुलजार सिंह की मौत का मामला: पंजाब के संगरूर जिले में गुलजार सिंह की मृत्यु के संदर्भ में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने बुधवार को राज्य सरकार से स्थिति रिपोर्ट मांगी है। अदालत ने पुलिस और एसएसपी कार्यालय से अब तक की गई कार्रवाई और जांच की प्रगति का विवरण भी मांगा है। याचिकाकर्ताओं ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की मांग की है, लेकिन अदालत ने इस संबंध में अभी कोई आदेश नहीं दिया है। सुनवाई के दौरान पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा का नाम भी चर्चा में आया। याचिकाकर्ताओं ने मंत्री को मामले में आरोपी बनाने और सीबीआई जांच की मांग की थी।


गुलजार सिंह का मामला क्या है?

गुलजार सिंह, जो संगरूर जिले के तुर बंजारा गांव के निवासी थे, ने नशे की समस्या पर पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा से सवाल उठाए थे। उनके परिवार का आरोप है कि इसके बाद गांव के सरपंच और अन्य लोगों ने उन्हें परेशान किया और माफी मांगने का दबाव डाला। इस तनाव के कारण उन्होंने जहर खा लिया, जिसके बाद उनकी मृत्यु हो गई। उन्होंने अपनी मौत से पहले एक वीडियो बनाया था, जिसमें उन्होंने मंत्री और कुछ स्थानीय लोगों पर गंभीर आरोप लगाए थे। गुलजार सिंह की मृत्यु के बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज की और सरपंच समेत कुछ लोगों को गिरफ्तार किया, लेकिन एफआईआर में मंत्री का नाम नहीं था, जिससे विपक्षी दलों ने विरोध किया।


पुलिस जांच की स्थिति

पंजाब पुलिस ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। उच्च न्यायालय ने राज्य से यह जानकारी मांगी है कि जांच में अब तक क्या कार्रवाई की गई है और किन पहलुओं की जांच की गई है। अदालत ने फिलहाल सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका पर कोई आदेश नहीं दिया है, बल्कि राज्य पुलिस की मौजूदा जांच की स्थिति की जानकारी मांगी है। स्थिति रिपोर्ट मिलने के बाद मामले में आगे की कार्रवाई तय की जा सकती है। गुलजार सिंह की मृत्यु का मामला राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग तक भी पहुंच चुका है, जिसने पंजाब सरकार को नोटिस जारी कर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।