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छात्रों के विरोध प्रदर्शन: NEET पेपर लीक और जौहर विश्वविद्यालय पर कार्रवाई

देश में शिक्षा से जुड़े दो महत्वपूर्ण मुद्दों पर छात्रों का विरोध बढ़ता जा रहा है। दिल्ली में NEET पेपर लीक के खिलाफ और रामपुर में जौहर विश्वविद्यालय के भवनों पर प्रस्तावित कार्रवाई के खिलाफ छात्र अनिश्चितकालीन धरने पर हैं। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने छात्रों के समर्थन में बयान दिया है। जानें इस मुद्दे पर और क्या हो रहा है और छात्रों की मांगें क्या हैं।
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छात्रों का विरोध बढ़ता जा रहा है

रामपुर/नई दिल्ली। देश में शिक्षा से संबंधित दो महत्वपूर्ण मुद्दों पर छात्रों का विरोध तेजी से बढ़ रहा है। एक ओर, दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक के खिलाफ छात्र लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उत्तर प्रदेश के रामपुर में मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के 38 भवनों पर प्रस्तावित प्रशासनिक कार्रवाई के खिलाफ छात्र अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इन मुद्दों पर केंद्र और राज्य सरकार की आलोचना करते हुए छात्रों के समर्थन में बयान दिया है।


दिल्ली में परीक्षा और रामपुर में शिक्षा का संकट

अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में कहा कि वर्तमान में देश में दो बड़े छात्र आंदोलन चल रहे हैं। उनके अनुसार, दिल्ली में छात्र परीक्षा प्रणाली के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं, जबकि रामपुर में एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक संस्थान को बचाने के लिए लड़ाई लड़ी जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि जौहर विश्वविद्यालय से हजारों छात्रों का भविष्य जुड़ा हुआ है और समाजवादी पार्टी का प्रतिनिधिमंडल छात्रों से मिलकर उनकी मांगों का समर्थन कर रहा है।


सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए

छात्र आंदोलनों पर टिप्पणी करते हुए, अखिलेश यादव ने सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक विरोध को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि 'हिटलर की सरकार में भी ऐसा होता था कि वह अपने राजनीतिक कार्यकर्ताओं को पुलिस की वर्दी पहनाकर दूसरे राजनीतिक कार्यकर्ताओं की पिटाई करवाता था।'


धरना जारी, छात्रों की मांगें

चौथे दिन भी जारी रहा छात्रों का धरना

रामपुर स्थित मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार पर छात्रों का धरना चौथे दिन भी जारी रहा। प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय के 38 भवनों के खिलाफ प्रस्तावित कार्रवाई को वापस लिया जाए। उनका तर्क है कि यदि यह कार्रवाई होती है, तो इसका सीधा असर हजारों विद्यार्थियों की पढ़ाई और भविष्य पर पड़ेगा।


प्रशासन पर दबाव बनाने के आरोप

धरने में शामिल छात्रों ने आरोप लगाया कि आंदोलन के दौरान उन पर दबाव बनाया जा रहा है और उनकी बात सुनने के बजाय उन्हें परेशान किया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अब तक प्रशासन की ओर से कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई है, हालांकि उन्हें उम्मीद है कि बातचीत के जरिए समाधान निकलेगा।