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जंतर मंतर हिंसा की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट की समिति 29 अक्टूबर को करेगी सुनवाई

जंतर मंतर पर 20 जुलाई को हुए प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय समिति 29 अक्टूबर को सुनवाई करेगी। इस समिति की अध्यक्षता रिटायर जज जस्टिस आर सुभाष रेड्डी कर रहे हैं। समिति ने एक ऑनलाइन पोर्टल भी स्थापित किया है, जहां लोग अपनी शिकायतें दर्ज कर सकते हैं। सुनवाई में प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों द्वारा पुलिस पर किए गए हमलों के सबूत पेश किए जा सकेंगे। जानें इस मामले में और क्या जानकारी है।
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जंतर मंतर पर प्रदर्शन की जांच


नई दिल्ली। जंतर मंतर पर 20 जुलाई को हुए प्रदर्शन और उसके बाद की हिंसा की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित पांच सदस्यीय समिति 29 अक्टूबर को सुनवाई करेगी। इस समिति की अध्यक्षता रिटायर जज जस्टिस आर सुभाष रेड्डी कर रहे हैं, जिन्होंने एक ऑनलाइन पोर्टल भी स्थापित किया है, जहां लोग अपनी शिकायतें दर्ज कर सकते हैं।


इस सुनवाई में कोई भी व्यक्ति प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई से संबंधित सबूत पेश कर सकता है। इसके अलावा, प्रदर्शनकारियों द्वारा पुलिस पर किए गए हमलों के सबूत भी प्रस्तुत किए जा सकते हैं। उल्लेखनीय है कि कॉकरोच जनता पार्टी ने नीट पेपर लीक और परीक्षाओं में गड़बड़ी के खिलाफ 36 दिनों तक प्रदर्शन किया था। 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई थी। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर बदसलूकी और पैलेट गन के इस्तेमाल के आरोप लगाए थे।


सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करते हुए 18 अगस्त को एक उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया था। यह समिति 29 अक्टूबर को सुबह 11 बजे से शिक्षा सदन, 17 राउज एवेन्यू इंस्टीट्यूशनल एरिया में सुनवाई करेगी। अधिक लोगों की भागीदारी और गवाहों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, समिति ने ऑनलाइन पोर्टल की शुरुआत की है। प्रभावित लोग, गवाह और अन्य संबंधित पक्ष इस पोर्टल पर अपने बयान और दस्तावेजी सबूत अपलोड कर सकते हैं।


यह समिति दोनों पक्षों द्वारा जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामलों की भी जांच करेगी। पहले यह कहा गया था कि सुनवाई 29 और 30 अक्टूबर को होगी, लेकिन बाद में स्पष्ट किया गया कि 29 अक्टूबर को केवल एक दिन की सुनवाई होगी। इस समिति में जस्टिस आर सुभाष रेड्डी के अलावा पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस रवि शंकर झा, दिल्ली हाई कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस शालिंदर कौर, पूर्व सीबीआई निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला और मेघालय के रिटायर डीजीपी एलआर बिश्नोई शामिल हैं।